नौनिहालों के पोषण व स्वास्थ्य के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों में पेयजल की व्यवस्था तक दुरुस्त नहीं है। बच्चों को पानी के लिए दूर-दराज हैंडपंपों पर जाना पड़ता है।
छोटे बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण के लिए करीब तीन हजार आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इसमें से 204 आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्वच्छ पेयजल की सुविधा नहीं है। नौनिहालों को प्यास बुझाने के लिए आसपास के स्कूल या फिर गांव में लगे सरकारी हैंडपंप पर जाना पड़ता है। केंद्र पर खाना बनाने के लिए सहायिकाएं भी हैंडपंप से पानी लाती हैं।
इन समस्याओं को दूर करने के लिए विभाग व प्रशासनिक अधिकारी गंभीर नहीं दिखते। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पेयजल की सुविधा के मामले में विकास खंड कमासिन की हालत ज्यादा खराब है।
यहां 34 केंद्रों पर हैंडपंप नहीं हैं। बबेरू व बिसंडा ब्लाक में भी 20-20 केंद्र ऐसे हैं जहां हैंडपंप सालों से खराब हैं या फिर हैं ही नहीं। नरैनी में 23, महुआ 13 और तिंदवारी ब्लाक में 17 केंद्र हैंडपंप विहीन हैं। बड़ोखर ब्लाक के 250 आंगनबाड़ी केंद्रों में 50 में हैंडपंप नहीं हैं।
बाल विकास विभाग में जिला कार्यक्रम अधिकारी, इशरत जहां ने कहा, कुछ केंद्रों पर पेयजल की असुविधा है। खराब हैंडपंपों तथा जहां हैंडपंप लगने है, वहां की सूची प्रशासन और जल निगम के पास भेजी गई है। केंद्रों पर शीघ्र पेयजल व्यवस्था कराई जाएगी।