कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते बहुजन सेवा संघ कार्यकर्ता।
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बहुजन सेवा संघ ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर 200 प्लाइंटर रोस्टर अध्यादेश लाने और इसे देश भर के विश्वविद्यालयों में लागू करने की मांग की। रविवार को प्रशासन के माध्यम से भेजे ज्ञापन में कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 7 अप्रैल 2017 को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और ओबीसी के लिए शैक्षणिक क्षेत्र में लागू 200 प्वाइंट रोस्टर की प्रक्रिया बदलकर उसके स्थान पर 13 प्वाइंट विभागवार शेष रोस्टर की व्यवस्था को वैध करार दिया है। इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने विशेष याचिकाएं दायर की गईं, लेकिन उन्हें खारिज कर दिया गया।
ज्ञापन में कहा गया है कि 13 प्वाइंट रोस्टर देश की 85 फीसदी बहुजन आबादी के संवैधानिक अधिकारों का हनन है। इससे एससी/एसटी व ओबीसी को उनका संवैधानिक अधिकार नहीं मिलेगा। कारण रोस्टर प्रक्रिया सिर्फ 13 पदों तक जाती है। इससे विभागों में होने वाली नियुक्तियों में 1 से 13 के मध्य क्रम संख्या 4 का पद पिछड़ी, क्रम संख्या 9 का पद अनुसूचित जाति और क्रम 12 का पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित है। ऐसे में यह रोस्टर एससी, एसटी और ओबीसी के लिए अन्याय है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि संस्था को इकाई मानकर 200 प्वाइंट रोस्टर अध्यादेश के जरिये पुन: बहाल किया जाए। तमाम शैक्षणिक पदों सहायक प्रोफेसर, सह प्रोफेसर और प्रोफेसर पदों पर देश भर के विश्वविद्यालयों में अध्यादेश लागू किया जाए। ज्ञापन देने वालों में बहुजन सेवा संघ संयोजक भानुप्रताप सिंह सहित धीरेंद्र, डॉ. अवधेश वर्मा, अधिवक्ता सुनील वर्मा, दयाराम वर्मा, घनश्याम, रामकरन वर्मा, देवकुमार वर्मा, कमलेश वर्मा, राकेश, सोनू कुमार, कृष्णपाल, अंकित कुमार, मनोज पटेल, निगम वर्मा, आदि शामिल रहे।