बुंदेलखंड के मशहूर पर्यटन स्थल कालिंजर दुर्ग की रास्ता अब और आसान होगी। नरैनी से कालिंजर तक के लिए फोरलेन सड़क निर्माण को शासन ने 200 करोड़ रुपये की योजना को हरी झंडी दिखा दी है। इसके अलावा गिरवां गांव से कालिंजर के लिए शॉर्ट कट रूट पर विचार किया जा रहा है>
यह जानकारी जिलाधिकारी सुरेश कुमार ने अपने आवास में आयोजित कालिंजर विकास गोष्ठी में दी। उन्होंने बताया कि कालिंजर को श्रेष्ठ पर्यटन केेंद्र के रूप में विकसित करने के लिए सड़क मार्ग से जोड़ा जाना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने इसे तवज्जो देकर नरैनी-कालिंजर मार्ग को फोरलेन के रूप में निर्मित करने के लिए मंजूरी दे दी है।
इस पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे। दो वर्ष में यह काम पूरा होगा। यह सड़क बन जाने के बाद बांदा मुख्यालय से कालिंजर का रास्ता सुगम हो जाएगा। डीएम ने बताया कि गिरवां गांव के पास खजुराहो को जोड़ने वाला पुल बन चुका है।
अब विचार किया जा रहा है कि इसे कालिंजर के लिए शॉर्ट कट रूट बनाया जाए। गोष्ठी में शामिल कालिंजर विकास संस्थान के संयोजक बीडी गुप्त ने कालिंजर के निकट बागै नदी के पास जलाशय के सुंदरीकरण के प्रस्ताव पर भी चर्चा की। कहा कि यह जलाशय खजुराहो से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करेगा।
जलाशय के नजदीक स्थित सुखना नाले से पानी लिफ्ट करके कालिंजर किले के सारे तालाब भरे जा सकते हैं। आसपास का क्षेत्र हरा-भरा हो जाएगा। दुर्ग की तलहटी में स्थित ऐतिहासिक सगना बांध के जीर्णोद्धार पर भी चर्चा हुई। कहा गया कि इससे तलहटी का वन क्षेत्र सघन हो जाएगा।
बीडी गुप्त ने बताया कि राजा अमान सिंह के महल की मूर्तियों और शिलालेख के लिए पुरातत्वविद और आईपीएस अधिकारी विजय कुमार के सहयोग से संग्रहालय का प्रयास किया जा रहा है। गोष्ठी में डीएम ने इस बात पर जोर दिया कि कालिंजर के आसपास स्थित अन्य ऐतिहासिक स्थलों को चिह्नित करके पर्यटकों के लिए विकसित किया जाए।
यहां स्थित पाषाण कालीन मनुष्य के शैल चित्र पर्यटकों को रिझा सकते हैं। गोष्ठी में अरविंद छिरौलिया ने कालिंजर गांव में लगे हजारों साल पुराने दो कल्पवृक्षों की उपेक्षा का भी मुद्दा उठाया। गोष्ठी में डॉ. हरिओम, प्रभाकर शर्मा, दीनदयाल सोनी, श्रीराम निषाद, वीरेंद्र कुमार पप्पू जी, उमाशंकर पांडेय आदि शामिल रहे।