बांदा। पांच वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म की कोशिश करने के जुर्म में आरोपी को अब 20 वर्ष जेल में बिताना होगा। अदालत ने 50 हजार रुपये जुर्माना भी किया है।
शहर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में 2 अक्तूबर 2014 की रात चल रही आर्केस्ट्रा पार्टी में 45 वर्षीय रमेश प्रजापति पुत्र रामविशाल भी मौजूद था। वह पड़ोसी गांव बरेठी से यहां अपने जीजा के घर आया था। रात करीब 8 बजे आर्केस्ट्रा देख रही पांच वर्षीय बालिका को उसने कुछ पैसे दिए और गोद में उठाकर नजदीक में बांस के पेड़ के नीचे ले गया। वहां उससे दुष्कर्म की कोशिश की।
बालिका के शोर मचाने पर उसका भाई और पड़ोसी आ गए। सभी ने रमेश को दबोच लिया और पिटाई के बाद कोतवाली ले जाते समय वह चकमा देकर भाग निकला। अगले दिन 7 अक्तूबर को बालिका के पिता ने रमेश के खिलाफ धारा 376, 511 व पॉक्सो एक्ट की रिपोर्ट दर्ज कराई।
आरोपी रमेश ने 27 अक्तूबर को अदालत में हाजिर होकर सरेंडर कर दिया। उसे जेल भेज दिया गया।
उधर, पुलिस ने विवेचना के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रामसुफल सिंह ने अभियोजन की ओर से सात गवाह पेश किए। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद शुक्रवार को अपर जिला सत्र न्यायाधीश ने अभियुक्त रमेश को सजा सुनाई। उसे जेल भेज दिया गया।
किशोरी से अश्लीलता में दो युवकों को 2-2 वर्ष की कैद
बांदा। बकरी चराने गई अनुसूचित जाति की किशोरी के साथ अश्लील हरकतें करने वाले दो युवकों को विशेष न्यायाधीश (एससीएसटी एक्ट) रामकरन द्वितीय ने धारा 354 आईपीसी में 2-2 वर्ष की कैद और एक-एक हजार रुपये जुर्माना किया है। घटना नरैनी कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में पहली सितंबर 2012 को दोपहर की है।
14 वर्षीय किशोरी को अनिल पुत्र अशोक अग्निहोत्री ने राजश्री खाने को दी। किशोरी ने इनकार कर दिया। इस पर अनिल ने अपने दोस्त रामू पुत्र राधेश्याम गर्ग को बुला लिया। उसने किशोर के साथ अश्लील हरकतें करते हुए जमीन में गिरा दिया। किशोरी बमुश्किल छूटकर भागी और घर में बताया। एसपी के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज हुई।
पुलिस ने चार्ज शीट दाखिल की। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता विमल सिंह व जावित्री प्रसाद ने 5 गवाह पेश किए। शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश ने दोनों आरोपियों को धारा 354 में 2-2 वर्ष की कैद और 1-1 हजार रुपये जुर्माना, धारा 504 में 6-6 माह की कैद, धारा 506 में 2-2 वर्ष की कैद की सजा सुनाई। एक-एक हजार रुपये जुर्माना या 15 दिन और जेल में रहने के आदेश दिए। अदालत ने एससीएसटी एक्ट के आरोप से बरी कर दिया।