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भोजन को 20 लाख, वेतन में करोड़ों खर्च

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मंडलायुक्त गौरव दयाल। - फोटो : BANDA
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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के इकलौते राजकीय मेडिकल कालेज में मंडल के चारों जिलों के भर्ती कोरोना मरीजों को कम बजट बताकर भले ही पतली दाल और चंद चपाती दी जा रही हो पर मेडिकल कालेज में भोजन का बजट भरपूर है। चालू वर्ष में भोजन के लिए 20 लाख रुपये मिले हैं।
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इसके अलावा वेतन का बजट करोड़ों में है। शायद ही कोई भत्ता बाकी हो जो मेडिकल कालेज को न मिल रहा हो। चालू वर्ष में कुल बजट 28.35 करोड़ मिल चुका है। जन सूचना अधिकार अधिनियम में समाजसेवी कुलदीप शुक्ला ने मेडिकल कालेज को कोरोना काल में मिले बजट की सूचना मांगी थी।
कालेज के जन सूचना अधिकारी डॉ. वीरेंद्र सिंह यादव ने दी सूचना में मेडिकल कालेज को मिलने वाले पूरे बजट का मदवार ब्योरा दिया है। इसमें आवंटन और खर्च दोनों है। वेतन मद में 7 करोड़ 16 लाख 95 हजार रुपये आवंटित हुए हैं। जून तक 2 करोड़ 29 लाख 79 हजार 745 रुपये (32 प्रतिशत) वेतन में दिए जा चुके हैं। यहां के डाक्टरों/स्टाफ को महंगाई भत्ते के रूप में एक करोड़ 79 लाख 24 हजार रुपये का बजट मिला है। इसमें जून तक 40 लाख 79 हजार 455 रुपये (22 प्रतिशत) बांटे जा चुके हैं।
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मार्च में कोरोना की शुरुआत के बाद मेडिकल कालेज को कोविड-19 अस्पताल के रूप में भी बदला जा चुका है। यहां मंडल के चारों जिलों के कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है। शुरुआत में यहां क्वारंटीन सेंटर भी था।
भर्ती मरीजों को मिल रहे घटिया खाने का पिछले माह वायरल हुए वीडियो से मेडिकल कालेज की काफी फजीहत हुई। मरीजों को दिए जा रहे खाने की थाली के वीडियो में दाल के नाम पर पानी साफ नजर आ रहा था।
सोशल मीडिया और खबरों की सुर्खियां बनने के बाद मंडलायुक्त गौरव दयाल ने भी इसका संज्ञान लिया था। प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश यादव का कहना था कि भर्ती मरीजों के लिए प्रतिदिन प्रति मरीज मात्र 46 रुपये स्वीकृत हैं। इसमें दोनों टाइम का भोजन और नाश्ता शामिल हैं। मीडिया में खबर आने के बाद मरीजों को एनएचएम से भोजन देने का प्रस्ताव डीएम को भेज दिया गया था। इसमें 100 रुपये प्रति मरीज को प्रतिदिन दर निर्धारित है।
प्राइवेट प्रैक्टिस बंदी भत्ता 50 लाख
बांदा। गुपचुप ढंग से घरों या दूसरे स्थानों पर डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस करने के बाद भी उन्हें प्रैक्टिस बंदी भत्ता लगातार दिया जा रहा है।
राजकीय मेडिकल कालेज के बजट में इस भत्ते के लिए 50 लाख रुपये आवंटितहुए हैं। यहां डाक्टरों को 13 लाख 64 हजार 810 रुपये प्रैक्टिस भत्ते के रूप में दिए जा चुके हैं। इसी तरह आउट सोर्सिंग सेवाओं के लिए 55 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें जून तक 15 लाख 39 हजार 209 रुपये का खर्च हो जाना बताया गया है।
कोरोना काल में मात्र 50 लाख मिले
बांदा। चार जिलों के कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे राजकीय मेडिकल कालेज को कोरोना संक्रमण काल के बीते पांच महीनों में शासन से सीधे कोई अतिरिक्त धनराशि नहीं मिली। अलबत्ता जिलाधिकारी स्तर से मात्र 50 लाख रुपये दिए गए हैं। यह जानकारी भी आरटीआई में दी गई है।
एनएचएम बजट से भोजन के लिए हुए टेंडर
बांदा। राजकीय मेडिकल कालेज प्रिंसिपल डॉ. मुकेश कुमार यादव का कहना है कि शासन द्वारा मिल रहे बजट से मेडिकल कालेज की व्यवस्थाएं संतोषजनक ढंग से चल रही है। मरीजों के इलाज और अन्य व्यवस्थाओं में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही। मरीजों के खाने की गुणवत्ता के सवाल पर प्रिंसिपल का कहना था कि एनएचएम बजट से भोजन की व्यवस्था के लिए टेंडर प्रक्रिया की जा चुकी है। मंडलायुक्त और डीएम स्तर से इसका निस्तारण होना बाकी है।

कुलदीप शुक्ला।- फोटो : BANDA

बांदा का राजकीय मेडिकल कालेज।- फोटो : BANDA

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