अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 29 हजार निर्माणाधीन अधूरे शौचालयों के लिए लगभग 18 करोड़ रुपये चाहिए। शौचालय बना रहे लाभार्थियों को अगली किस्त नहीं मिल पा रही। ऐसे में दो अक्तूबर तक पूरा जिला ओडीएफ घोषित होना खटाई में पड़ सकता है। दूसरी तरफ पंचायती राज विभाग का दावा है कि पैसे की कमी नहीं है। ग्राम पंचायतों की डिमांड पर जल्द ही धनराशि भेजी जाएगी।
पंचायती राज विभाग के आंकड़ों में 1,49,422 शौचालय विहीन परिवार हैं, जिन्हें अनुदान दिया जाना है। इसमें 29,859 परिवारों को अनुदान की पहली किस्त भी नहीं मिल पाई। इनके शौचालय अधूरे पड़े हैं। स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत शौचालय निर्माण के लिए एक लाभार्थी को 12 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता है। यह पैसा लाभार्थी को छह-छह हजार रुपये की दो किस्तों में मिलता है। जनपद को खुले में शौचमुक्त घोषित करने के लिए शासन ने दो अक्तूबर तक का समय दिया है। राजस्व गांवों के ओडीएफ व शौचालय निर्माण के आंकड़ों को देखें तो अभी काफी लक्ष्य शेष है। जिला पंचायत राज अधिकारी संजय यादव का कहना है कि बजट की कमी नहीं है। ग्राम पंचायतों की डिमांड पर एक सप्ताह के अंदर पैसा भेज दिया जाएगा।
शौचालय निर्माण में खराब प्रगति वाली ग्राम पंचायतों को चिन्हित किया गया है। पंचायती राज विभाग ने प्रत्येक विकास खंड से उन 15-15 ग्राम पंचायतों की फेहरिस्त तैयार की है, जिनकी प्रगति खराब है। यह सूची अधूरे शौचालयों की संख्या के आधार पर बनाई गई है। नरैनी में 8657, बिसंडा में 5495, तिंदवारी में 5211, महुआ में 3886, बबेरू में 2848, जसपुरा में 1994, कमासिन में 1699, बड़ोखर खुर्द में 69 शौचालय अधूरे हैं।
-एसबीएम ग्रामीण के तहत बनाए जा रहे हैं शौचालय
-खराब प्रगति वाली ग्राम पंचायतें चिन्हित
-जनपद के विकास खंडों में अधूरे पड़े शौचालयों का ब्योरा-