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450 की बालू 7000 में, फिर भी मंत्री बता रहे सस्ती

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अमर उजाला ब्यूरो
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बांदा। बालू उपभोक्ताओं को चूना लगाने में माफियाओं के साथ सरकारी की भी रजामंदी साफ नजर आ रही है। प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री ने कहा है कि बालू 22 से 25 रुपये प्रति क्यूबिक (घन फिट) उपलब्ध है यानी 825 रुपये प्रति घन मीटर। जबकि खदानों के आसपास बेची जा रही बालू की कीमत साढ़े 15 गुना ज्यादा वसूली जा रही है। तीन घन मीटर बालू से भरी ट्रैक्टर ट्राली मंडल मुख्यालय में 7000 रुपये में मिल रही है। जबकि इसमें भरी बालू की रायल्टी मात्र 150 रुपये है। उधर, मंत्री भी 25 रुपये प्रति घन फिट यानी 825 रुपये घन मीटर बालू की दर बता रहे हैं। उत्तर प्रदेश उप खनिज (परिहार) नियमावली 1963 के मुताबिक रायल्टी की दर मात्र 150 रुपये प्रति घन मीटर निर्धारित है।


प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री ने मंगलवार को विधानसभा में दावा किया है कि बालू का सरकारी रेट 22 से 45 रुपये प्रति घन फिट है। एक घन मीटर बालू की कीमत 825 रुपये है। रायल्टी की दर 150 रुपये घन मीटर है। बांदा जनपद में ई-टेंडर के बाद पट्टों पर चल रही खदानों में ठेकेदारों ने 1020 रुपये प्रति घन मीटर तक रायल्टी पर ठेके लिए हैं। यह सरकारी रायल्टी से साढ़े छह गुना से भी ज्यादा है। इतनी कीमत पर भी उपभोक्ताओं को बालू मिल जाती तो गनीमत थी।
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बालू माफिया और सिंडीकेट की सांठगांठ से आम उपभोक्ता को सरकारी दर के मुकाबले साढ़े 15 गुना ज्यादा कीमत देने पड़ रही है। उदाहरण के लिए तीन घन मीटर (लगभग 100 वर्ग फिट) बालू से भरी ट्रैक्टर ट्राली बांदा शहर में ही कम से कम 7000 रुपये में बिक रही है। जबकि इस बालू की कीमत 150 रुपये घन मीटर रायल्टी की दर से सिर्फ 450 रुपये होती है। आम उपभोक्ताओं को साढ़े 15 गुना बालू मिल रही है। इसके अलावा जितनी दूरी पर बालू की बिक्री होगी उसका ट्रांसपोर्ट खर्च उतना ही बढ़ता जाएगा।
-150 रुपये प्रति घन मीटर है सरकारी रायल्टी की दर
-माफिया और सिंडीकेट लगा रहे उपभोक्ताओं को चूना
-प्रदेश के मंत्री ने 22 से 25 रुपये घन फिट बताई बालू की दर
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