अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। प्रदेश सरकार की फसल ऋण मोचन योजना तमाम किसानों के लिए छलावा साबित हो रही है। भारतीय स्टेट बैंक ने 132 बकायेदार किसानों को रिकवरी चालान (आरसी) जारी कर दिया। राजस्व विभाग के संग्रह अमीन किसानों की तलाश में चक्कर लगा रहे हैं।
पिछले वर्ष प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड के लघु एवं सीमांत किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की थी। कुछ को इसका लाभ भी मिला, लेकिन बड़ी संख्या में अभी भी इस योजना से वंचित हैं। ताजी बानगी में भारतीय स्टेट बैंक की अतर्रा ब्रांच की कृषि शाखा ने 132 किसानों से वसूली के लिए आरसी जारी कर दी है।
तहसील क्षेत्र के थनैल गांव निवासी सुरेश कुशवाहा ने बताया कि वर्ष 2008 में कृषि विकास शाखा से 45 हजार ऋण लिया था। कर्जमाफी का लाभ नहीं मिला और उसके नाम आरसी जारी हो गई। अमीन 31 जनवरी तक कर्ज अदायगी का दबाव बना रहे हैं।
इसी गांव के राजेंद्र, आऊ गांव के रामचरण तथा फतेहगंज के रामाश्रय ने आरोप लगाया कि बैंक अधिकारी कर्जमाफी शिकायत पर भगा देते हैं। रुपये जमा करने को धमकाया जाता है। उधर, इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक, इलाहाबाद बैंक, भारतीय स्टेट बैंक कृषि शाखा ने लगभग 6000 किसानों की कर्जमाफी के लिए सूची भेजी थी, लेकिन 2000 किसानों का ही कर्ज माफ हुआ।
4000 किसानों का कर्जमाफ नहीं हुआ। बैंक अधिकारियों का कहना है कि कर्ज राशि न लौटाने वाले किसानों के खाते नॉन पेमेंट एकाउंट (एनपीए) हो गए हैं। ऐसे में उनकी कर्जमाफी नहीं हो पा रही। उधर, स्टेट बैंक शाखा प्रबंधक (कृषि) जेपी सिंह का कहना है कि कर्जमाफी योजना के पूर्व जिन किसानों को आरसी जारी की जा चुकी थी, उन्हीं से वसूली हो रही है। ये किसान कर्जमाफी के दायरे में नहीं हैं।
स्टेट बैंक ने 132 किसानों को जारी की आरसी
राजस्व अमीन वसूली के लिए तलाश रहे किसान
तीन बैंकों के 4000 किसानों का कर्ज माफ नहीं
प्रबंधक बोले-योजना से पहले जारी हुई थी आरसी