बांदा। लगातार बारिश और जलभराव के चलते मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया। इससे मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। मलेरिया की शुरुआत भी हो चुकी है, लेकिन मलेरिया विभाग के पास इससे निपटने के संसाधन नहीं हैं। यहां तक कि टीकाकरण की भी व्यवस्था नहीं है।
नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव व कीचड़ से मच्छरों की फौज तैयार हो गई है। इससे मलेरिया मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। पिछले माह जुलाई में 7,803 लोगों के खून के नमूनों की बनाई गई स्लाइडों में 38 लोग मलेरिया से पीड़ित पाए गए। जनवरी से अब तक जिले में 34,179 स्लाइडें बनाई गईं। इनमें 171 मरीज मलेरिया के मिले हैं। मलेरिया से बचाव के लिए तैयारियों के नाम पर विभाग में न तो डीडीटी है और न ही फील्ड स्टाफ है।
जिला मलेरिया अधिकारी विजय शंकर ने बताया कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (हाउस विजिटर) का काम घर-घर जाकर संभावित मरीजों की स्लाइड बनाकर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना है। जिले में 106 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं में सिर्फ छह की तैनाती है।
सौ पद खाली होने से लगभग 20 लाख की आबादी वाले जिले में स्लाइड लेने का काम नहीं हो पा रहा। डीडीटी छिड़काव भी पिछले वर्ष अधिक मलेरिया रोगी पाए जाने वाले 14 गांवों में ही किया जाएगा। विभाग के पास डीडीटी का स्टाक खत्म है। बताया कि 10 मीट्रिक टन की डिमांड भेजी गई है। अपर निदेशक मलेरिया (लखनऊ) की स्वीकृति मिलने पर मुख्यालय से इसकी आपूर्ति होती है।
उधर, जिला मुख्यालय समेत किसी भी स्वास्थ्य केंद्र में मलेरिया निरोधक टीका लगाने की व्यवस्था नहीं है। फॉगिंग के लिए विभाग के पास मात्र 60 लीटर मैलाथियान है। सिर्फ जिला मुख्यालय में एक बार फागिंग में 45 लीटर मैलाथियान खत्म हो जाती है। नालियों में मच्छरों का लार्वा खत्म करने के लिए दवा वाई-लार्वा का छिड़काव सिर्फ कागजों पर हो रहा है। बांदा में पांच और अतर्रा नगर पालिका में दो फील्ड वर्कर ही तैनात हैं।
इन गांवों में होगा डीडीटी छिड़काव
बांदा। जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि नरैनी और बिसंडा कस्बा समेत महुआ, सेमरिया जदीद, बबेरू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के पुंगरी, रयान, कबीरपुर, निभौर, वन बरौली, मियां बरौली और बिसंडा पीएचसी क्षेत्र के कछिया पुरवा व लोधन पुरवा में डीडीटी का छिड़काव किया जाएगा। पिछले वर्ष बनाई गई स्लाइडों में इन कस्बों और गांवों में मलेरिया के सर्वाधिक रोगी पाए गए थे।