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‘30 से संपतियों के आनलाइन होंगे बैनामे और रजिस्ट्री‘ खबर से संबंधित चित्र परिचय-

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अमर उजाला ब्यूरो
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बांदा। बुंदेलखंड समेत प्रदेश के कई जनपदों में अवैध खनन की जांच कर रही सीबीआई की लेटलतीफी और हीलाहवाली पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने नाराजगी जताई है। कहा है कि सीबीआई ने लंबे अरसे से अपनी जांच की ताजी रिपोर्ट न्यायालय में पेश नहीं की है। हाईकोर्ट ने अब इन जनपदों के पुलिस अधीक्षकों को विवेचनाधिकारी के साथ न्यायालय में तलब किया है। अगली सुनवाई तीन नवंबर को होगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांदा, हमीरपुर, फतेहपुर, शामली, कौशांबी जिले में अवैध खनन की जांच के लिए पिछले वर्ष सीबीआई को आदेश दिए थे। पिछले वर्ष अगस्त माह में सीबीआई टीम ने बांदा आकर खनिज विभाग से तमाम दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए थे। इसके अलावा हमीरपुर में दो चरणों में कई-कई दिन डेरा डालकर स्थलीय जांच की और अभिलेख हासिल किए हैं। सीबीआई की जांच अभी जारी है। हाईकोर्ट ने छह सप्ताह में जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे। इसके बाद समय-समय पर जांच रिपोर्ट उच्च न्यायालय में पेश करते रहने को कहा था।
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13 अक्तूबर को मामले की सुनवाई में हाईकोर्ट ने सीबीआई पर नाराजगी जताई। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिलीप बी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने अपने आदेश में कहा है कि सीबीआई के वकील ने कोर्ट में अर्जी देकर विवेचना की वर्तमान स्थिति रिपोर्ट पेश करने को समय (मोहलत) दिए जाने की मांग की है। न्यायालय ने कहा कि जबकि 19 मई 2017 को उन्हें मौका दिया जा चुका है। सीबीआई लंबे समय से विवेचना की वर्तमान स्थिति नहीं बता रही है।
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न्यायाधीशों ने आदेश दिया कि अब अगली तिथि में संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक भी विवेचना अधिकारी के साथ स्वयं न्यायालय में उपस्थित हों। हाईकोर्ट ने सीबीआई के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि आईजी (सीबीआई) उत्तर प्रदेश को इस आदेश से एक सप्ताह के भीतर सूचित करें। साथ ही सरकार के वकील को निर्देश दिया कि पिछले वर्ष 9 सितंबर को दिए गए न्यायालय के आदेश के अंतिम पैरा का जवाब अगली तारीख में दाखिल करें।

अवैध खनन में हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षकों को किया तलब
बुंदेलखंड समेत कई जिलों में कर रही है सीबीआई जांच
लंबे अरसे से जांच रिपोर्ट न देने पर कोर्ट का रुख
तीन नवंबर को होगी अगली सुनवाई
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