स्नान कर सूर्य और चंद्रमा को दिया अर्घ्य नदी और तालाबों में किया गया तर्पण
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बांदा। महिलाओं ने 16 शृंगार कर महालक्ष्मी का पूजन किया और सूर्य को अर्घ्य देकर धन और वैभव की कामना की। नवाब टैंक और केन नदी के घाटों समेत विभिन्न तालाबों में पूजा के लिए महिलाओं की भीड़ उमड़ी।
महिलाओं ने महालक्ष्मी का पंडाल बनाकर वस्त्र व सफेद फूल आदि चढ़ाए। 128 बार तर्पण कर पूजा किया। पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराया। व्रत रखा और घरों में पकवान बनाए। मिट्टी के हाथी पर सवार गज लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की। हल्दी, चंदन, रोली आदि चढ़ाकर मन्नतें मांगी। 16 गांठ का सूत (गंडा) बनाया और लक्ष्मी का जाप करते हुए पूजन किया। 16 बार तर्पण कर गांठ लगाई।
कलावा व शृंगार का सामान और प्रसाद चढ़ाया। महालक्ष्मी की कथा सुनी और 16 परिक्रमा व आरती की। चंद्रमा उदय से अस्त तक पूजा करती रहीं। रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर महिलाओं ने परायण किया। ज्योतिषाचार्य पंडित उमाकांत त्रिवेदी ने बताया कि महालक्ष्मी का विधि विधान से पूजन करने पर वैभव, धन संपत्ति व वाहन की मनोकामना पूरी होती है।