नदियों में रात-दिन भारी-भरकम मशीनों से खनन, पेड़ों की अंधाधुंध कटान, क्रेशरों की धूल और धुआं से बुरी तरह प्रदूषित बुंदेलखंड में पांच जून को एक बार फिर विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की तैयारी है। वन विभाग अबकी इसे कुछ अलग तर्ज पर मनाने की बात कह रहा है। उधर, इसी बरसाती सीजन (वर्षाकाल) में बुंदेलखंड में 1.44 करोड़ पौधे रोपने की तैयारी की जा रही हैं।
पूर्ववर्ती प्रदेश सरकारों के कार्यकाल में भी बुंदेलखंड में करोड़ों पौध रोपे गए। करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन बुंदेलखंड में हरियाली राष्ट्रीय वन नीति के मानक के मुताबिक नहीं आ पाई।
राष्ट्रीय वन नीति के तहत 33 फीसदी वन क्षेत्र होना चाहिए। जबकि बुंदेलखंड में मात्र 7.44 फीसदी वन क्षेत्र है। किसी भी जनपद में यह मानक पूरा नहीं है। प्रभागीय वनाधिकारी एमपी गौतम ने बताया कि पूरे प्रदेश में अबकी 22 करोड़ पौधे रोपे जाना हैं।
बुंदेलखंड के सातों जनपदों में 1,44,40,860 पौधे रोपे जाएंगे। बांदा जनपद में 20,64,168 पौधों का लक्ष्य है। इसमें 7,96,690 पौधे वन विभाग लगाएगा। शेष 12,67,478 पौध रोपण की जिम्मेदारी अन्य विभागों को दी गई है।
डीएफओ बताते हैं कि इस वर्ष सभी रोजगार सेवक को वृक्ष अभिभावक (ट्री गार्जियन) बनाया जा रहा है। किसानों से कम से कम 10 पौध रोपने का अनुरोध किया गया है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर पांच जून को ग्राम प्रधान, रोजगार सेवक, वृक्ष अभिभावक, प्रगतिशील और पंजीकृत किसान एक साथ पौधरोपण अभियान में भागीदारी करेंगे। इन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पौधशालाओं को आदर्श पर्यावरण स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। पौधशालाएं सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेंगी।
वन भूमि में अवैध कब्जे अपराध श्रेणी में शामिल हैं। लेकिन वन विभाग की लापरवाही कहें या ढिलाई कि चित्रकूटधाम मंडल में 0.546 हेक्टेअर वन भूमि में अवैध कब्जे हैं। मंडल में कुल वन भूमि 10809.973 हेक्टेअर बताई गई है। आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष सागर का कहना है कि सरकारें दोहरे चरित्र अपना रही हैं।
एक ओर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटान और नदियों में अवैध खनन से पर्यावरण चौपट हो रहा है तो दूसरी तरफ पर्यावरण सुधार के नाम पर पौध रोपण के दिखावे किए जा रहे हैं।