बांदा। अपराधियों से निपटने वाली पुलिस को अब दंगाइयों से भी सामना करने में माहिर बनाया गया है। जिले की पुलिस में ऐसे 174 जवान तैयार किए गए हैं, जो दंगे की हालत में हालात पर काबू पाएंगे। खास बात यह है कि इनमें 60 महिलाएं भी हैं। ट्रेनिंग से लौटे इन रिक्रूट आरक्षियों को शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक जीपी साहा ने भी कुछ टिप्स दिए।
जिले में भर्ती हुए रिक्रूट में 174 को दंगा नियंत्रण का प्रशिक्षण दिया गया है। यह ट्रेनिंग नागपुर (महाराष्ट्र) में दी गई है। 6 माह की ट्रेनिंग कर लौटे रिक्रूट को शुक्रवार को पुलिस लाइन ग्राउंड में सुबह की परेड के दौरान पुलिस अधीक्षक ने भी कुछ गुर सिखाए। साथ ही उनकी बुद्धि और शारीरिक दक्षता को परखा। इसमें थाना प्रभारियों को भी शामिल किया गया। एसपी के निर्देशन में सभी को दंगा नियंत्रण का रिहर्सल कराया गया।
हैंड ग्रेनेड, आंसू गैस, चिली बम और एंटी राइट गन चलाने के तरीके बताए गए। उनसे शॉर्ट और लॉंग रेंज में फायरिंग कराई गई। दंगे के दौरान होने वाले फायदे और नुकसान से आगाह किया गया। यह भी बताया कि बल प्रयोग कब और किन हालात में करना है या नहीं करना है। दंगा नियंत्रण की ट्रेनिंग लेने वालों में 60 महिला कांस्टेबिल भी शामिल हैं। महिला-पुरुष दोनों रिक्रूट्स को थानों में तैनाती दी जा चुकी है।
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पुलिस अधीक्षक जीपी साहा ने थाना प्रभारियों से कहा है कि चुनाव के दौरान बूथ स्तर पर आने वाली समस्याओं और उनके निदान के सुझाव दे, ताकि उसी आधार पर कार्रवाई की जा सके। थाना प्रभारियों के साथ बैठक में पुलिस अधीक्षक ने प्रांतीय और जनपदीय सीमाओं के थाना क्षेत्रों में विशेष चेकिंग अभियान और अपराधियों की धरपकड़ के निर्देश दिए। कच्ची और अवैध शराब के बारे में संशोधित आदेशों के बारे में अवगत कराएं। थाना प्रभारियों से कहा कि चुनाव सकुशल निपटाने के लिए बूथ लेबल पर तैयारी और समस्याओं का समाधान पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। ब्यूरो