बांदा। फसल बेचकर बेटियों के हाथ पीले करने का मंसूबा रखे किसानों को खरीद एजेंसियों की हीलाहवाली मायूस करने के साथ ही समाज में शर्मसार भी कर रही है। किसानों की बेटियों की शादियां और उनकी रस्में पूरी नहीं हो पा रहीं। कई किसानों ने बेटी ब्याहने के लिए विवाह की कुछ रस्में भी कर डाली हैं, लेकिन बारात और विदाई अटक गई है। कई ने मजबूरन शादी की तारीखें बढ़ा दी हैं।
किसानों की आमदनी का एकमात्र सहारा उनकी फसल है। धान की फसल के बाद ही शादी की सहालग होती है। बेटियों की शादी के लिए साल की शुरुआत से ही तैयारी शुरू कर देते हैं। फसल बेचकर मिलने वाली रकम पर उन्हें भरोसा रहता है, लेकिन खरीद एजेंसियों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
कई किसान बेटियों की शादी को लेकर दुविधा में पड़ गए हैं। इसकी बानगी बड़ोखर विकास खंड में मवई गांव के किसान रामभवन हैं। उन्होंने बताया कि बेटी सपना की शादी 22 फरवरी को तय कर दी है। यूपी एग्रो को उसने दो बार में 97 हजार रुपये का धान बेचा था, लेकिन खरीद एजेंसी ने उसके 55 हजार रुपये रोक लिए हैं। इससे उसकी शादी का बजट गड़बड़ा गया है। वह लगातार एजेंसी के चक्कर लगा रहा है। भुगतान नहीं हुआ तो शादी की तारीख बढ़ाने की नौबत आ सकती है।
इसी तरह महुआ विकास खंड के बलखेरा गांव के किसान राम प्रसाद ने बताया कि पुत्री की शादी 25 फरवरी को होनी है। काफी तैयारियां हो चुकी हैं। उसने 55 हजार रुपये का धान एग्रो एजेंसी को बेचा था। उम्मीद थी कि सरकार के आदेशों के मुताबिक 24 घंटे में पैसा मिल जाएगा। पर उसकी यह उम्मीद धरी रह गई। लगभग एक माह से एजेंसी के चक्कर लगा रहा है। भुगतान का आश्वासन देकर टरकाया जा रहा है। बेटी की शादी को मात्र एक हफ्ता बचा है। ऐसे में वह और उसका परिवार परेशान है।
निर्देशों पर अमल न करने वालों पर होगी कार्रवाई
बांदा। किसानों को शासनादेश के मुताबिक 24 घंटे के अंदर धान की कीमत न मिलने के बाबत जनपद में धान खरीद के नोडल अधिकारी/अपर जिलाधिकारी संतोष बहादुर सिंह का कहना है कि सभी खरीद एजेंसियों को यह स्पष्ट निर्देश हैं कि धान खरीदने के बाद अगले दिन तक किसान का पूरा भुगतान कर दिया जाए। ऐसा हो भी रहा है। उन्होंने कहा कि जहां कहीं भुगतान न होने की शिकायत मिलेगी उस पर जांच कराकर संबंधित एजेंसी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।