अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। प्रदेश सरकार ने सामूहिक विवाह योजना के तहत इसी माह सरकारी मंडप में गरीबों की शादियां कराने का निर्देश दिया था। 474 कन्याओं की शादी के लिए 1.66 करोड़ रुपये भी नवंबर में यहां भेज दिए। लेकिन अब तक एक भी आवेदन नहीं आया। ऐसे में शासन ने शादी अनुदान की पुरानी व्यवस्था भी बहाल कर दी है।
सपा शासन काल में पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति और सामान्य जाति की गरीब बेटियों की शादी में 20 हजार रुपये अनुदान दिए जाने की योजना लागू की थी।
भाजपा सरकार ने इसे बंद कर नवंबर में ‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह’ योजना लागू कर दी। इसमें 35 हजार मंजूर हुए हैं। 20 हजार रुपये कन्या के खाते में और 15 हजार में खाना, जेवर व दहेज शामिल हैं। बीडीओ व नगर निकायों को नोडल बनाया गया है। सामूहिक विवाह जनवरी में होना था लेकिन अभी तक एक भी आवेदन नहीं आया है। अधिकारियों ने स्वयंसेवी संगठनों से भी संपर्क किया लेकिन सफलता नहीं मिली।
उधर, सामूहिक विवाह योजना फ्लॉप होते देख शासन ने पुरानी शादी अनुदान योजना को शुरू कराने का निर्णय लिया है। पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी डॉ. प्रीतिलता ने बताया कि शादी अनुदान के 2281 आनलाइन आवेदन आए हैं। 539 की पात्रता जांच की जा रही है। जल्द ही डीएम की बैठक में इनका अनुमोदन कराकर अनुदान खातों में भेजा जाएगा। समाज कल्याण में सामान्य वर्ग के ग्रामीण क्षेत्रों में 247 और शहर में 34 आवेदन लंबित हैं। अनुसूचित जाति के शहर में 90 व ग्रामीण क्षेत्रों के बीडीओ स्तर पर 1128 आवेदन लंबित हैं। इनका सत्यापन कराने को तहसीलदारों व बीडीओ को पत्र भेजा गया है।
बांदा। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में शुभ मुहूर्त भी बाधक बन गया है। दरअसल जनवरी में एक भी शादी के मुहूर्त नहीं हैं। 11 फरवरी से सहालग शुरू हो रही हैं। शासन ने जनवरी माह में विवाह का कार्यक्रम रख दिया है। ऐसे में आवेदन करने वाले कन्नी काट रहे हैं। एक बीडीओ ने बताया कि आवेदन के लिए आए कई परिवारों ने मुहूर्त की बात उठाई है।
-शासन ने जनवरी में सामूहिक विवाह के दिए थे निर्देश
-नवंबर में आ चुका है 1.66 करोड़ का बजट