बांदा। चहारदीवारी बनाकर कब्रिस्तानों को अतिक्रमण से बचाने के लिए पिछली सरकार द्वारा लागू की गई योजना में गड़बड़ी और मानकों की अनदेखी पर 78.49 लाख रुपये शासन को वापस भेज दिए गए।
सपा सरकार ने वर्ष 2013-14 में कब्रिस्तानों में बाउंड्री निर्माण की योजना शुरू की थी। चार सालों में इसके लिए शासन ने बांदा जनपद को 4 करोड़ 5 लाख रुपये जारी किए। कार्यदाई संस्था कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विस (उत्तर प्रदेश जल निगम) को बनाया गया।
अल्पसंख्यक विभाग के मुताबिक वर्ष 2013-14 में 10 कब्रिस्तानों के लिए एक करोड़ 19 लाख 98 हजार 800 रुपये मिले। इसमें चिलेहटा, तेरही माफी, कनवारा, जसईपुर, कोर्रही,दफ्तरा, मलेहरा निवादा, पिथौराबाद, तुर्रा प्रथम व द्वितीय में संस्था ने चहारदीवारी बनाई।
वर्ष 2014-15 में 8 कब्रिस्तानों के लिए 80.21 लाख रुपये मिले। इसमें तिंदवारी, बछौंधा, निभौर, भवई, पुकारी, बिसंडा, धौसड़, इटरा खुर्द शामिल हैं। वर्ष 2015-16 में 6 कब्रिस्तानों के लिए 48 लाख 32 हजार 755 रुपये मिले। इनमें अछरौड़, भीटी, बरुआ स्योढ़ा, करतल, बसरेही व कोर्रा बुजुर्ग गांवों के कब्रिस्तानों को चयनित किया गया।
वर्ष 2016-17 में 14 कब्रिस्तानों का 1.56 करोड़ 97 हजार 610 रुपये शासन ने दिए। इनमें रामपुर, पारा बिहारी, बछौंधा, रसूलपुर, रींग, कनाय, नगर पंचायत बिसंडा, अतर्रा ग्रामीण, मकरी, जखनी, लुकतरा, परसौड़ा व जमुआ गांव में बाउंड्री बनना था। लेकिन कार्यदाई संस्था पिछले साल पूरा पैसा नहीं खर्च पाई। 11 चहारदीवारी अधूरी पड़ी हैं।
दूसरी किश्त का 78.49 लाख रुपये इस साल अप्रैल में मौजूदा योगी सरकार ने दिए। लेकिन इसके बाद भी इस योजना पर सरकार ने रोक लगा दी और यह पैसा वापस मंगा लिया। अब जिले की कई कब्रिस्तानों की बाउंड्री अधूरी पड़ी हैं।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आरडी यादव ने कहा कि चहारदीवारी निर्माण में जो भी गड़बड़ी होगी वह तो जांच रिपोर्ट मिलने पर पता चलेगा। बजट के आधार पर स्थल का चयन संस्था ने खुद किया है। अल्पसंख्यक विभाग को सिर्फ इस्टीमेट की जानकारी दी जाती थी। समिति स्वीकृति दे देती थी। फिलहाल किसी भी तहसील से सत्यापन रिपोर्ट नहीं मिली है। उन्हें रिमाइंडर भी भेजे गए हैं।
-दो साल में नहीं बन पाईं 11 कब्रिस्तानों की चहारदीवारी
-38 चहारदीवारी में ज्यादातर अधूरे, मानक भी दरकिनार
-भाजपा सरकार ने लगाई चहारदीवारी निर्माण योजना पर रोक
अमर उजाला ब्यूरो