नरैनी क्षेत्र के 15 हजार से ज्यादा मनरेगा मजदूरों की दिवाली अधिकारियों ने फीकी कर दी। दो माह की मजदूरी के करीब डेढ़ करोड़ रुपये बकाया हैं। 10 हजार से ज्यादा मजदूर शहरों में ईंट-गारा कर रहे हैं। इनके पास दीवाली मनाने के लिए फूटी कौड़ी नहीं है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) मजदूरों व उनके परिवारों को दो वक्त की रोटी तक नहीं मुहैया करा पा रही है। कहा जाए तो इस योजना में हर साल हजारों करोड़ रुपये गांवों में मजदूरों के नाम पर खर्च किए जाते हैं, लेकिन मजदूर परिवार ज्यों की त्यों तंगहाल बने हैं। ब्लाक की सभी 88 ग्राम पंचायतों में योजना के तहत जुलाई माह तक काम कराए गए हैं।
मजदूरों ने मेहनत कर कहीं सड़क खोदी तो कहीं तालाब। भुगतान की बारी आई तो अब मजदूर चक्कर लगा रहे हैं। क्षेत्र के 15 हजार से ज्यादा मजदूरों को भुगतान के लाले हैं। विकास खंड कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक लगभग डेढ़ करोड़ मजदूरी बकाया है। अगस्त माह से मनरेगा काम ठप हैं। सढ़ा गांव के प्रधान राम किशोर सिंह ने बताया कि सिर्फ उनके गांव में 10 लाख रुपया मजदूरी बकाया है।
उधर, जल निगम कर्मचारियों को जून माह से वेतन नहीं मिला है। जल निगम 16वीं शाखा में तैनात करीब दो दर्जन से ज्यादा कर्मचारियों का चार माह से वेतन नहीं मिला। उनके घर दिवाली कैसे मनेगी। एक्सईएन पीके स्वामी ने बताया कि छोटे कर्मियों को ‘जुगाड़’ कर एक माह का पैसा दिया जा रहा है। ताकि पर्व पर वह खुशियां मना सकें। कर्मचारियों के आग्रह पर अधीक्षण अभियंता ने किसी अन्य मद से पैसे का जुगाड़ किया है। जब वेतन का बजट आएगा तब उसमें समाहित किया जाएगा, लेकिन जेई, एई और एक्सईएन की दिवाली बिना वेतन बीतेगी।