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बांदा में 1342 तालाबों का मिट गया नामोनिशान

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बांदा। बुंदेलखंड में जल संरक्षण की चल रही कवायदों में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र भी शामिल हो गए हैं। बांदा जनपद के बाशिंदे और विश्वविद्यालय में शोध छात्र रामबाबू तिवारी नेतृत्व कर रहे हैं। शोध छात्रों ने गांवों में चौपाल और पंचायतों के बीच बताया कि बांदा में 3294 तालाब में 1342 का नामोनिशान मिट चुका है। मात्र 1952 तालाब बचे हैं। अभी भी सुध न ली गई तो इनका भी वजूद मिट जाएगा।
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रामबाबू ने बताया कि अब तक वह तीन बार बांदा में पानी यात्राएं निकाल चुके हैं। गांवों में शोध छात्रों की टीम ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति प्रेरित कर रही है। बताया कि अब तक 67 गांवों में 1550 जल मित्र और जल सहेली बनाए जा चुके हैं। जल साक्षरता अभियान चलाया जा रहा है। ग्रामीणों को प्राकृतिक स्रोत कुआं, पोखर, छोटी नदियां, नाले, तालाब से जोडने की कोशिश हो रही है। बबेरू क्षेत्र के अधांव, पिंडारन गांवों में स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से चार तालाबों का पुनरुद्धार किया जा चुका है। रामबाबू ने बताया कि अधांव गांव में हर मंगलवार को बजरंग बली आश्रम में स्थानीय ग्रामीण रामायण का पाठ और भंडारे के बाद तालाबों के लिए सामूहिक श्रमदान करते हैं। यहां दो तालाबों का पुनरुद्धार किया गया है। शोध छात्र किसानों को अपनी पुरानी परंपरा के मुताबिक मोटे अनाजों के उत्पादन को भी प्रेरित कर रहे हैं। इनमें मक्का, ज्वार, राई, पड़ुवा, बाजरा आदि फसलें शामिल हैं।
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