बांदा। तीन दशक बीत गए बांदा के बाशिंदों को अपना सांसद नहीं मिला। करीब 35 साल पहले 1984 में बांदा के भीष्मदेव दुबे सांसद बने थे। उनके बाद से यह कुर्सी दूसरे जिलों के हाथों में गई तो आज तक वापस नहीं मिली। इस दौरान मात्र एक को छोड़कर सभी सांसद चित्रकूट जिले के रहे। 1998 में भाजपा से सांसद बने रमेशचंद्र द्विवेदी मूलरूप से कौशांबी जिले के रहने वाले हैं। इस चुनाव में भी पूरे आसार हैं कि बांदा के बाशिंदे के सिर सांसद का ताज नहीं बंधेगा।
1984 में आठवीं लोकसभा चुनाव तक सांसद का ताज बांदा के सिर बंधता रहा। मात्र 1957 में प्रताप के राजा दिनेश सिंह कांग्रेस से सांसद चुने गए थे। उनके बाद से छह सांसद बांदा के हुए। यहां के अंतिम सांसद कांग्रेस के भीष्मदेव दुबे 1984 हुए थे। इसके बाद 1989 में बसपा के रामसजीवन और 1991 में भाजपा के प्रकाश नारायण त्रिपाठी, 1996 में बसपा के फिर रामसजीवन सांसद हुए।
1998 में भाजपा के रमेशचंद्र द्विवेदी सांसद चुने गए। वह मूल रूप से कौशांबी जिले के हैं। हालांकि बांदा जिले के अतर्रा में भी उनका मकान है। उनके बाद 1999 में फिर तीसरी बार बसपा के रामसजीवन सांसद चुने गए। 2004 में सपा के श्यामाचरण गुप्त और 2009 में सपा के आरके सिंह पटेल तथा वर्ष 2014 में भाजपा के भैरो प्रसाद मिश्र सांसद हुए। ये सभी मूल रूप से चित्रकूट जिले के रहने वाले हैं। चित्रकूट जिला बांदा संसदीय सीट में ही शामिल है।
वर्तमान चुनाव वर्ष 2019 में सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस के घोषित प्रत्याशी (श्यामाचरण गुप्त व बालकुमार पटेल) भी बाहरी हैं। दोनों चित्रकूट जिले के हैं। सूत्रों के मुताबिक भाजपा प्रत्याशी भी चित्रकूट जिले के हो सकते हैं। इनमें मौजूदा सांसद भैरो प्रसाद मिश्र का नाम सर्वोपरि है।