बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में आधा सैकड़ा से अधिक बसें ठोंक पीटकर चलाई जा रही हैं। यह बसें खटारा और उम्र पार कर चुकी हैं। इन्हें कबाड़खाने में होना चाहिए, लेकिन यात्रियों की जान जोखिम में डालकर इन्हें दौड़ाया जा रहा है। हालांकि परिवहन निगम इन बसों से कुछ कमाई भी नहीं कर पा रहा है। जितना भाड़ा आ रहा है, उससे ज्यादा लागत जा रही है। यात्रियों को असुरक्षा और असुविधा के साथ ही यात्रा में समय भी ज्यादा गंवाना पड़ रहा है।
मंडल में परिवहन निगम के बेड़े में 322 बसें हैं। इनमें यूं तो 40 फीसदी बसें जर्जर हालत में हैं। लेकिन आधा सैकड़ा बसें ऐसी हैं जो पूरी तरह खटारा हो चुकी हैं। यह 12 लाख किलोमीटर का मानक पूरा कर चुकी हैं। इन्हें कंडम घोषित करके खड़ा कर दिया जाना चाहिए। लेकिन निगम इन्हें ठोंक पीटकर सड़कों में दौड़ा रहा है। आए दिन यह बीच रास्ते में खराब हो जाती हैं। यात्री धक्का देकर स्टार्ट कराते हैं।
इनमें सेल्फ स्टार्ट की व्यवस्था नहीं है। चलने के दौरान इनकी बाडी इतना शोर करती हैं कि यात्री एक-दूसरे की आवाज नहीं सुन पाते। खटारा बसों के चलते दुघर्टनाओं का ग्राफ भी बढ़ा है। पिछले एक साल का रिकार्ड देखें तो पांच यात्रियों की बस दुर्घटना में जान जा चुकी है। चार दर्जन से अधिक घायल हुए हैं। परिवहन निगम में इन बसों को सी-श्रेणी में शामिल किए हुए है। इनका रोड फैक्टर 30 से 40 फीसद ही है। इनकी आमदनी से सिर्फ कंडक्टर और चालक का वेतन ही निकल पा रहा है। निगम को अतिरिक्त आमदनी नहीं हो पा रही।
खटारा बसों से 10 फीसदी ही बचत
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के परिवहन निगम बेड़े में प्रथम श्रेणी की 70-75 प्रतिशत, द्वितीय श्रेणी की बसें 50-60 प्रतिशत और तृतीय श्रेणी की बसें महज 30-40 फीसदी ही रोड फैक्टर दे रही हैं। तृतीय श्रेणी की कमाई में 25 फीसदी आय चालक व परिचालक के वेतन और डीजल तथा मरम्मत में खर्च हो जाता है। निगम को 5 से 10 प्रतिशत ही आमदनी होती है।
आरएम बोले- सभी बसें दुरुस्त
चित्रकूटधाम मंडल के परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव अग्रवाल का कहना है कि सभी बसें चालू हालत में हैं। ऐसी कोई नहीं है जिसे चलाया नहीं जा सके। खटारा बसों को भी दुरुस्त कर दिया गया है। प्रथम श्रेणी की बसें हाल ही के वर्षों में आई हैं।
मंडल में परिवहन निगम के पास 422 बसों का बेड़ा, 50 से अधिक खटारा बसों पर चल रहे यात्री
उम्र पूरी कर चुकने के बाद भी चलाई जा रहीं, आए दिन हो रहीं खराब
अमर उजाला ब्यूरो