बांदा। कृषि विश्वविद्यालय को केन नदी से जलापूर्ति की परियोजना के लिए सरकार द्वारा दी गई पहली किस्त ही धरी रह गई। इसे खर्च हुए बगैर दूसरी किस्त भी जारी कर दी गई है। यह परियोजना 18 करोड़ 74 लाख रुपये लागत की है। इसमें अब तक 14 करोड़ 32 लाख रुपये दिए जा चुके हैं, लेकिन काम नहीं शुरू हुआ। परियोजना की यह रकम फिलहाल कृषि शिक्षा अनुसंधान के खाते की शोभा बढ़ाएगी।
बांदा कृषि विश्वविद्यालय में पानी के संकट को देखते हुए पिछले वर्ष बुंदेलखंड पैकेज से केन सिंचाई परियोजना को मंजूरी मिली थी। योजना के तहत केन नदी से विश्वविद्यालय तक नहर खोदकर पानी लाया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 7 करोड़ 49 लाख रुपये दो माह पूर्व अगस्त में आवंटित कर दिए थे।
परियोजना को अंजाम देने के लिए जल निगम 16वीं शाखा कार्यदायी संस्था नामित की गई है। अब तक इस योजना पर काम शुरू नहीं किया गया है। प्रदेश सरकार ने पहली किस्त खर्च हुए बगैर 5 नवंबर को 6 करोड़ 83 लाख की दूसरी किस्त भी जारी कर दी है।
उधर, जल निगम के अवर अभियंता राजेंद्र कुमार का कहना है कि अब तक जल निगम के खाते में परियोजना का पैसा नहीं आया है। दूसरी तरफ कृषि विश्वविद्यालय के जनसपर्क अधिकारी डा. बीके गुप्ता का कहना है कि शासन द्वारा जारी दोनों किश्तों का पैसा विशेष सचिव कृषि शिक्षा अनुसंधान के खाते पर डाल दी गई है।