बांदा। जंगली जानवरों का जानलेवा हमला अब दैवी आपदा माना जाएगा। जान गंवाने पर मृतक आश्रितों को पांच लाख रुपये मिलेंगे। घायल होने पर 25 हजार रुपये कभी मदद दी जाएगी। प्रदेश सरकार ने नौ श्रेणी के जानवरों के हमले को इसमें शामिल किया है।
दी जाने वाली आर्थिक मदद में चार लाख रुपये राज्य सरकार और एक लाख रुपये वन विभाग देगा। प्रदेश के मुख्य संरक्षक वन ने शासन के इस फैसले से जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर अवगत कराया है।
जंगलों में काम करने वाले किसानों, चरवाहों, ग्रामीणों आदि पर अक्सर जंगली जानवर हमले कर देते हैं। इसमें कई बार हमले जानलेवा साबित होते हैं। कुछ में गंभीर रूप से घायल होना पड़ता है, लेकिन वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत जंगली जानवरों को मारना या हानि पहुंचाना अपराध है। इनके हमले में प्राण गंवाने या घायल होने पर सरकार कोई मुआवजा नहीं देती थी।
अब सरकार ने जंगल के कुछ चुनिंदा जानवरों के हमले को दैवी आपदा श्रेणी में शामिल कर लिया है। इनमें बाघ, शेर, तेंदुआ, भेड़िया, लकड़बग्घा, मगरमच्छ, हाथी, गैंडा, जंगली सूअर आदि शामिल हैं। इनके हमले में मरने पर आश्रितों को चार लाख रुपये राज्य सरकार व एक लाख रुपये वन विभाग देगा। घायल होने पर 25 हजार रुपये तक की सहायता वन विभाग देगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (जीव) पवन कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर शासन के फैसले से अवगत कराया है।
जंगली जानवर के हमले में जान गंवाने या घायल होने पर आश्रितों को दैवी आपदा के तहत सहायता देने के लिए कुछ नियम-शर्तें लागू किए गए हैं। इनमें कहा गया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एसडीएम की जांच रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि होनी चाहिए कि मृत्यु जंगली जानवर के हमले से हुई। एसडीएम व लेखपाल मौके पर जाकर जांच और सत्यापन करेंगे। शव का पोस्टमार्टम जरूरी है।