बांदा। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा घोषित प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में किसानों का सर्वेक्षण 6 फरवरी से शुरू होगा, जो 11 फरवरी तक चलेगा। गठित टीमें राजस्व ग्रामों का भ्रमण और सर्वेक्षण करेंगी। 1 दिसंबर 2018 से लागू की गई इस योजना में 31 मार्च 2019 तक की पहली किस्त के 2000 रुपये लघु और सीमांत किसानों के खातों में भेजे जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने पहली किस्त में आधार कार्ड की अनिवार्यता नहीं की है, लेकिन अगले वर्ष 2019-20 से आधार कार्ड अनिवार्य होगा। इस बाबत उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव अनूपचंद्र पांडेय ने मंगलवार को शासनादेश जारी कर दिया है।
सदर तहसीलदार अवधेश निगम ने बताया कि शासनादेश पर तत्काल काम शुरू हो गया है। लेखपालों की बैठक कर एसडीएम ने उन्हें समयबद्ध सर्वे आदि के निर्देश दिए हैं। शासनादेश के मुताबिक इस योजना का क्रियान्वयन डीएम के नेतृत्व में होगा। सीडीओ नोडल अधिकारी होंगे। कृषि विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। भूलेख से क्षेत्रफल के अनुसार लघु और सीमांत किसानों को चिह्नित किया जाएगा।
चिह्नित किसानों को दो भागों में बांटा गया है। पहले भाग-एक में वे नाम रहेंगे जो पारदर्शी किसान की उस गांव की सूची में उपलब्ध हों। भाग-दो में उस गांव के ऐसे लघु व सीमांत किसानों को शामिल किया जाएगा, जिनके नाम पारदर्शी किसान के पोर्टल में दर्ज नहीं हैं। भाग-एक में यदि पति-पत्नी या उनके नाबालिग बच्चे तीनों के नाम अलग-अलग भूमि उपलब्ध है तो उसे जोड़ते हुए एक इकाई माना जाएगा। तीनों में से किसी एक को ही लाभार्थी की अंतिम सूची में रखा जाएगा। इस परिवार की अन्य गांवों में स्थित भूमि को जोड़ते हुए पात्रता निर्धारित की जाएगी।
सदर तहसीलदार अवधेश निगम ने शासनादेश का हवाला देकर बताया कि सूची तैयार करने के लिए लेखपालों के साथ उतनी ही संख्या में ग्राम विकास, पंचायती राज, कृषि, सहकारिता आदि विभागों के कर्मचारी लगाए जाएंगे। लेखपाल के साथ एक अन्य कर्मचारी को शामिल कर ग्राम स्तरीय टीमें बनेंगी। प्रत्येक टीम को राजस्व गांव की संख्या आवंटित की जाएगी। यह टीमें रोजाना शाम को अपने आंकड़े जिला स्तर पर उपलब्ध कराएंगी।
शासनादेश में कहा गया है कि 6 फरवरी से 11 फरवरी तक सभी राजस्व गांवों में भ्रमण और सर्वे किया जाएगा। तहसीलदार ने बताया कि मंगलवार को शासनादेश मिलते ही सदर तहसील में इस पर अमल शुरू हो गया है। एसडीएम थमीम अंसरिया ने लेखपालों के साथ बैठक कर उन्हें सूची तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। सभी कार्य समयबद्ध हैं।
अंश निर्धारण में पात्र होने पर ही मिलेगा लाभ
शासनादेश के मुताबिक भाग-एक में शामिल सभी किसानों के डाटा 12 फरवरी तक प्रधानमंत्री पोर्टल पर अपलोड होंगे। शामिल खाता होने पर हर किसान परिवार की भूमि की गणना अलग-अलग की जाएगी। लघु और सीमांत श्रेणी में आने पर ही उन्हें योजना का लाभ मिलेगा।
उदाहरण के तौर पर किसी के खाते में 8 हेक्टेयर भूमि है और उसमें 6 सह खातेदार हैं तो अंश निर्धारण के आधार पर एक अथवा उससे अधिक कृषक परिवार या पूरा परिवार लघु एवं सीमांत श्रेणी में आते हैं तो उन्हें शामिल किया जाएगा। भाग-दो में किसानों के पहचानपत्र, मोबाइल नंबर आदि संग्रह करने के लिए 12 फरवरी से 14 फरवरी तक तिथियां निर्धारित कर दी जाएंगी। इन तिथियों में गांवों में विशेष शिविर लगेंगे। शेष रह गए कृषक परिवार (भाग-दो) की सूचना एकत्रित की जाएगी।
पूर्व या मौजूदा जनप्रतिनिधि आदि योजना से बाहर
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में किसान होते हुए भी कई श्रेणियों के लोग योजना से बाहर रखे गए हैं। मुख्य सचिव द्वारा जारी शासनादेश में कहा गया है कि इस श्रेणी के कृषक परिवारों को योजना का गाइड लाइन के मुताबिक अपात्र घोषित किया गया है। इनमें भूतपूर्व या वर्तमान में संवैधानिक पद धारक। भूतपूर्व या वर्तमान मंत्री/राज्यमंत्री। भूतपूर्व या वर्तमान सांसद (लोकसभा/राज्यसभा), विधायक (विधानसभा/विधान परिषद), भूतपूर्व या मौजूदा नगर पालिका मेयर। भूतपूर्व या वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष। केंद्र व राज्य सरकार के सभी अधिकारी/कर्मचारी।
केंद्र या राज्य सरकार सहायतित अर्द्ध सरकारी संस्थान। स्वायत्तशासी संस्थान तथा स्थानीय निकायों के नियमित कार्मिक (चतुर्थ श्रेणी/समूह-घ को छोड़कर)। पिछले वर्ष आयकर भुगतान करने वाले किसान। सेवानिवृत्त पेंशनधारक जिनकी मासिक पेंशन 10 हजार या इससे अधिक है (चतुर्थ श्रेणी/समूह-घ को छोड़कर)।
पेशेवर डाक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता, चार्टर्ड अकाउंटेंट, आर्किटेक्ट आदि जो संबंधित पेशे के लिए पंजीकरण करने वाली संस्था में पंजीकृत हैं और यह पेशा कर रहे हैं। तहसीलदार ने बताया कि शासनादेश में कहा गया है कि लाभार्थियों या उसके पति-पत्नी से घोषणा पत्र भरवाया जाएगा। इसमें दी गई सूचना असत्य पाए जाने पर दी गई धनराशि भू राजस्व की भांति वसूल ली जाएगी।