अमर उजाला ब्यूरो
बांदा।
न अपने सांसद की सुनी, न चुनावों में मिले भरपूर वोटों की परवाह की। आम बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली की पोटली से बुंदेलखंड नदारद रहा। बांदा-चित्रकूट के भाजपा सांसद भैंरो प्रसाद मिश्र ने बजट के 10 दिन पूर्व 19 जनवरी को दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात करके दो पत्र सौंपे थे। एक में बुंदेलखंड में गंभीर रूप ले चुकी अन्ना पशु समस्या के लिए बजट में विशेष वित्तीय व्यवस्था और दूसरे पत्र में बुंदेलखंड के रेलमार्गों के दोहरीकरण के लिए बजट आवंटित किए जाने का अनुरोध किया गया था। उधर, लोकसभा चुनाव में लगभग 20 लाख और विधान सभा चुनाव में 10 लाख से ज्यादा वोट देकर संसद और विधानसभा की सभी सीटें भाजपा की झोली में डाल देने वाले मतदाता भी अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। बजट में कुछ अलग न मिलने से यहां के किसान भी मायूस हुए हैं। आम बजट को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है।
राज्य सभा सदस्य और सपा के राष्ट्रीय महासचिव विशंभर प्रसाद निषाद ने कहा कि आम बजट में बुंदेलखंड के लिए कुछ नहीं है। जिस तरह आम चुनाव में लोक लुभावन भाषण देकर वोट हथिया लिए गए उसी तरह सब्जबाग दिखाकर बजट में बुंदेलखंड को ठेंगा दिखा दिया गया। रेलवे क्षेत्र में भी बुंदेलखंड की अनदेखी कर दी गई। अन्ना प्रथा और सिंचाई आदि के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया। यह बजट सिर्फ पूंजीपतियों को बढ़ाने वाला है। बुंदेलखंडियों सहित गरीबों, बेरोजगारों और किसानों को निराशा हाथ लगी है।
पूर्व सांसद प्रकाश नारायण त्रिपाठी उर्फ काका ने आम बजट को चुनावी बजट बताया। कहा कि किसानों के लिए जो होना था वह नहीं किया। टैक्स छूट की सीमा तीन लाख नहीं की गई। बुंदेलखंड में खेत और पेट के पानी का हमेशा बरकरार रहने वाले संकट की ओर ध्यान नहीं दिया गया। पूर्व सांसद ने कहा कि गांवों में विद्युतीकरण में करोड़ों रुपये खपाने के बजाए सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना चाहिए था।
पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता विवेक कुमार सिंह ने आम बजट पर कहा कि भाजपा की सरकार से किसान, मजदूर और गरीब जनता को कोई उम्मीद लगाना बेमतलब है। पिछले चार वर्ष के कार्यकाल में यह बात अच्छी तरह साफ हो गई है। भाजपा सरकारों में बुंदेलखंड की जो अनदेखी और दुर्दशा की जाती है वह किसी सरकार में नहीं होती। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बुंदेलियों ने पूरे बुंदेलखंड को भगवामय कर दिया। सारी सीटें भाजपा को झोली में डाल दीं। फिर भी भाजपा सरकार को शर्म नहीं आई। संभवत: अपने आखिरी बजट में भी बुंदेलखंड की अनदेखी कर दी। बुंदेलखंड के 40 लाख से ज्यादा लोग अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में बजट का बदला भाजपा का बंटाधार करके लेंगे।
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सदस्य सुधीर सिंह ने आम बजट को देशी-विदेशी पूंजी का हित साधने वाला बताया। कहा कि यह जनविरोधी और जुमलेबाजी का बजट है। पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाया गया है। आम जनता को कोई राहत नहीं दी गई है। मनरेगा में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई। किसानों को उपज का डेढ़ गुना दाम की घोषणा सिर्फ गुमराह करने वाली बात है। बुंदेलखंड के लिए अलग से कुछ खास नहीं दिया गया। बजट नीति का दुष्परिणाम भारत की आम जनता को भुगतना पड़ेगा।
बांदा-चित्रकूट से भाजपा सांसद भैंरो प्रसाद मिश्र ने आम बजट को आम आदमी के हितों वाला बताया है। उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि केंद्र सरकार ने बुंदेलखंड की उपेक्षा की है। बजट भाषण में केंद्रीय वित्त मंत्री ने बुंदेलखंड की भी चर्चा की है। किसानों का समर्थन मूल्य डेढ़ गुना करने की मांग बुंदेलखंड के किसानों की ओर से उन्होंने सबसे पहले की थी। सांसद ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम में पांच लाख परिवारों को प्रति वर्ष शामिल किए जाने की योजना बहुत बड़ी है। उन्होंने कहा कि बुंदेेलखंड के बारे में अभी वह प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से और रियायतों का अनुरोध करेंगे।
बांदा। बुंदेलखंड राज्य निर्माण संघर्ष समिति अध्यक्ष अधिवक्ता अतुल यादव ने कहा कि है कि आम बजट में बुंदेलखंड राज्य गठन की घोषणा तो दरकिनार इस पिछड़े क्षेत्र को अलग से फूटी कौड़ी भी नहीं दी गई। अपनी इस घोर उपेक्षा से समूचे बुंदेलखंड के लोग अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। आम बजट में सिर्फ कारपोरेट जगत का हित साधा गया है। श्री यादव ने मांग की कि बुंदेलखंड में हर क्षेत्र के विशेष पैकेज दिया जाए।
-जेटली की बजट पोटली से बुंदेलखंड नदारद
-बुंदेलखंड में सभी सांसद और विधायक भाजपा के
-आम बजट में नहीं दिखा बुंदेलखंड से प्रेम