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मुख्यालय समेत पूरे जनपद में बिजली का संकट

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बांदा/मटौंध/बबेरू। शहरों को 22 और गांवों को 20 घंटे बिजली देने की मुख्यमंत्री की घोषणा हवा-हवाई साबित हो रही है। इमरजेंसी कटौती और फाल्टों से शहर को बमुश्किल 18 और गांवों को 10 से 15 घंटे ही बिजली मिल रही है। उमस और गर्मी में बढ़े बिजली संकट पर जगह-जगह प्रदर्शन और ज्ञापन की होड़ है।
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मंगलवार रात 10:30 से 12 बजे रात तक मंडल मुख्यालय अंधेरे में रहा। पावर कारपोरेशन अभियंताओं ने इमरजेंसी कटौती बताया। सुबह से पीली कोठी फीडर से जुड़े अमर टाकीज, अलीगंज, गूलरनाका, जल संस्थान कार्यालय आदि में दिन भर बिजली गुल रही।

दोपहर को स्वतंत्रता स्मारक अशोक लाट तिराहे में तार टूट कर गिरने से बांबेश्वर और संकट मोचन फीडर घंटों बंद रहे। उधर, मटौंध में जर्जर तार टूटने व ट्रांसफार्मर फुंकने से आएदिन बिजली बंद रहती है। पिछली दो रात से मटौंध नगर और आसपास के गांवों के हजारों उपभोक्ता बिन बिजली बिलबिला रहे हैं।
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पूनम रैकवार, धर्मेंद्र सिंह, जगत सिंह, राजेंद्र सिंह, मुबारक खां, मनोज वर्मा, श्रीविशाल, श्यामबाबू तिवारी, जगदेव सिंह, पारथ कुशवाहा, नरेंद्र तिवारी आदि ग्रामीणों ने बताया कि बमुश्किल 10 घंटे ही बिजली मिल रही है। भूरागढ़ सब स्टेशन के मटौंध फीडर से तीन दर्जन से ज्यादा गांवों को जोड़ा गया है। इससे आए दिन बिजली ठप रहती है।

बबेरू में भी बिजली का जबरदस्त संकट है। अधिवक्ताओं और व्यापारियों ने बिजली संकट पर एसडीएम को ज्ञापन दिया था। फिर भी आपूर्ति नहीं सुधरी। निर्धारित शेड्यूल से बहुत कम बिजली मिलने से ग्रामीणों में रोष है। खप्टिहा कलां प्रतिनिधि के मुताबिक नए कालेश्वर सब स्टेशन में घटिया उपकरणों के फाल्टों से बिजली धड़ाम रहती है। रात को कई-कई घंटे बिजली न रहने से उमस और गर्मी में लोगों का बुरा हाल है।
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-फाल्टों से नाक में दम, शहर से कस्बों तक लोगों में रोष
अमर उजाला ब्यूरो
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