बांदा। स्कूलों के मिड-डे मील की गुणवत्ता अब बच्चों की माताएं खुद परखेंगी। इसके लिए हर विद्यालय में ‘मां’ कमेटी गठित की जाएगी। समिति की सदस्य माताएं बारी-बारी से एक-एक दिन स्कूल में रहकर मिड-डे मील पर नजर रखेंगी। चखकर सुझाव या शिकायत रजिस्टर में दर्ज करेंगी।
चित्रकूटधाम मंडल में 3880 प्राथमिक स्कूलों में 4,32,226 बच्चे हैं। 1992 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में 2,06,872 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इसके अलावा 40 हजार से ज्यादा बच्चे सहायता प्राप्त और सरकारी स्कूलों के हैं। प्रदेश के मिड-डे मील योजना निदेशक अब्दुल समद ने डीएम और बीएसए को भेजे पत्र में मिड-डे मील योजना की निगरानी के लिए ‘मां’ समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।
कहा कि इसे राजकीय, परिषदीय, सहायता प्राप्त विद्यालयों और तहतानिया मदरसों व बाल श्रमिकों के विद्यालयों में लागू किया है। विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के महिला अभिभावकों का रोस्टर तैयार किया जाएगा। बारी-बारी से महिला अभिभावक विद्यालय में उपस्थित रहकर मिड-डे मील बनाने से लेकर परोसने तक पर नजर रखेंगी। प्रधानाध्यापक उनका पूरा सहयोग करेंगे।
खंड शिक्षा अधिकारियों से कहा गया है कि सप्ताह भर के अंदर मां अभियान टीम गठित कराएं। बेसिक शिक्षा अधिकारी व जिला स्तरीय अधिकारी अपने निरीक्षण में समिति की महिलाओं द्वारा लिखी गई टिप्पणी का भी अवलोकन करेंगे। चित्रकूटधाम मंडल के 96 परिषदीय स्कूलों में धनराशि होने के बाद भी बच्चों को फल नहीं दिया जा रहा है।
मिड-डे मील योजना निदेशक अब्दुल समद ने डीएम को भेजे पत्र में आईवीआरएस रिपोर्ट का हवाला देकर कहा है कि बांदा में 42, हमीरपुर में 12, महोबा में 18 और चित्रकूट में 24 स्कूलों के छात्र-छात्राओं को फल नहीं बांटे जा रहे हैं, जबकि सभी स्कूलों के लिए फल का बजट उपलब्ध है। उन्होंने डीएम से जांच कर लापरवाह प्रधानाध्यापकों पर कार्रवाई और मेन्यू के मुताबिक मिड-डे मील संचालन कराने को कहा है।
-स्कूलों में गठित होंगी मां अभिभावकों की कमेटी
-रजिस्टर में लिखे उनके सुझावों पर होगा अमल
अमर उजाला ब्यूरो