बांदा। दहेज की मांग पूरी न होने पर पत्नी की फांसी लगाकर हत्या कर देने के जुर्म में अदालत ने पति को सात साल की जेल और 5000 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर दो माह की अतिरिक्त जेल होगी। ससुर, देवर और दो ननद व ननदोई को बरी कर दिया गया।
कर्वी (चित्रकूट) कोतवाली क्षेत्र के रसिन गांव निवासी सुकरू पुत्र छोटा ने बांदा कोतवाली में 13 मार्च 2014 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने अपनी बेटी आशा की शादी मई 2009 में बांदा शहर के बिजलीखेड़ा निवासी सर्वेंद्र उर्फ संजय चौधरी पुत्र मुन्नीलाल के साथ की थी। तीन लाख रुपये नकद, एक बाइक व डेढ़ लाख का सामान दिया था। सोने की जंजीर सहित कुछ अन्य दहेज मांगा गया।
रिश्तेदारों के समझाने पर किसी तरह से मान गए। लेकिन ससुराल में पति सर्वेंद्र उर्फ संजय, ससुर मुन्नीलाल चौधरी, देवर छोटा, ननद मंजू पत्नी धर्मेंद्र व अंजू पत्नी महेश दहेज की मांग पूरी करने का दबाव बनाते रहे। 12 मार्च 2014 की आधी रात को ससुराल वालों ने आशा को मारपीट कर फांसी के फंदे पर टांग दिया, जिससे मौत हो गई।
रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने तफ्तीश के बाद अदालत में पति के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। अन्य आरोपी ससुराल वालों के नाम पुलिस ने हटा दिए, लेकिन अदालत ने शेष आरोपियों को भी तलब कर लिया।
प्रथम त्वरित न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार पंचम ने अभियोजन व बचाव पक्ष की सुनवाई के बाद गुरुवार को सुनाए फैसले में पति सर्वेंद्र उर्फ संजय को धारा 304 बी में 7 साल की कैद व 5000 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। दहेज उत्पीड़न में दो वर्ष का कारावास व 2000 रुपये जुर्माना, 3/4 दहेज एक्ट में एक वर्ष की जेल और 1000 जुर्माना की सजा सुनाई। सभी सजाएं साथ चलेंगी।
आरोपी पति 10 माह से जेल में है। जेल में बिताई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी। अन्य आरोपियों को सुबूत के अभाव में बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता आशुतोष मिश्र ने 8 गवाह पेश किए।