बैंकों में भीड़ की बयार बहने को 10 दिन हो गए। लाइनों में कोई कमी नहीं आई। दूसरी तरफ केंद्र सरकार एटीएम और खातों से निकाली जाने वाली राशि में लगातार कमी करती चली जा रही है।
शुक्रवार को 10वें दिन भी बैंक और एटीएम सुबह से शाम तक भीड़भाड़ और शोरगुल से गूंजते रहे। ज्यादातर बैंक सुबह निर्धारित समय से लेटलतीफ खुल रहे हैं। बंद जल्दी किए जा रहे हैं। बैंक प्रबंधकों पर प्रशासन कोई दबाव नहीं बना पा रहा।
स्टेट बैंक की साख पर लग रहा दाग
स्टेट बैंक मुख्य शाखा (कचहरी) : उपभोक्ताओं में सबसे ज्यादा रोष और नाराजगी इसी ब्रांच में है। प्रबंधक की मनमानी और तानाशाही स्टेट बैंक की साख पर दाग लगा रही है। शुक्रवार को भी यह निर्धारित समय से आधा घंटा देरी से खुला। वह भी तब जब लोगों ने हंगामा शुरू किया।
टोकन मिलने के बाद भी कई उपभोक्ताओं को खाली हाथ वापस लौटाया गया। इस ब्रांच में उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी भी हो रही है। उनकी आईडी से कोई दूसरे लोग पहले ही पैसा निकाल लेते हैं। शाखा प्रबंधक शिकायत अनसुनी कर रहे हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं में उन पर भी संदेह पैदा हो रहा है। बैंक के बाहर लगी एक एटीएम में दोपहर को कैश खत्म हो गया।
वृद्ध कैशियर से काम हुआ सुस्त
इलाहाबाद बैंक, मुख्य शाखा (गूलर नाका) : मात्र दो काउंटर होने से लंबी लाइनें लगी रहीं। निकासी काउंटर पर वृद्ध कर्मचारी को बैठाए जाने से काम की रफ्तार ढीली रही। एक्सचेंज में सिर्फ एक हजार रुपये दिए गए। शाम चार बजते ही चैनल बंद कर दिया गया। तमाम टोकन धारक बैरंग लौट गए।
प्रबंधक के नदारद रहने पर मचा शोर
इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक (सिविल लाइन) : नोट बदलने में दो हजार रुपये दिए जाने के आदेश का यहां भी पालन नहीं हुआ। सिर्फ एक हजार रुपये ही दिए गए। हंगामा हुआ तो दोपहर बाद कुछ लोगों को दो हजार दिए गए। छोटी बाजार शाखा में देर तक प्रबंधक नदारद रहे। हंगामा मचने पर डेढ़ घंटा तक सिर्फ पैसा जमा हुआ। दोपहर से कैश बंटना शुरू हुआ।
7 बजे से लाइन, 10 बजे खुलता है बैंक
इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक (बड़ोखर बुजुर्ग) : सुबह 7 बजे से लाइन लग जाती है। बैंक 10 के बाद खुलता है। सैकड़ों की भीड़ में केवल एक सिपाही की ड्यूटी लगी है। यहां सिर्फ पैसा जमा किया जा रहा है। एक्सचेंज नहीं हो रहा। उपभोक्ता परेशान है। प्रेमनारायण कुशवाहा ने बताया कि मैनेजर ने पैसा लेने या बदलने से साफ मना कर दिया। प्रबंधक एके सिंह का कहना है कि अभी स्याही नहीं आई। इसलिए पैसा नहीं बदला जा रहा।