16 साल पूर्व जिला अस्पताल परिसर में हृदय रोग
विशेषज्ञ डॉ. जीके अग्रवाल के सरकारी आवास में दिनदहाड़े हुई लूट के मामले
में अदालत ने तीन आरोपियों को सजा सुनाई। इन्हें 10-10 वर्ष की कैद और
15-15 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। तीनोें मुजरिमों को जेल भेज दिया
गया।
जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ पद पर तैनात डॉ. जीके
अग्रवाल अपनी पत्नी वंदना अग्रवाल के साथ अस्पताल परिसर में स्थित सरकारी
आवास में रहते थे। 24 फरवरी 1999 को सुबह डॉ. अग्रवाल ड्यूटी पर चले गए। घर
में पत्नी वंदना और नौकरानी थी।
दोपहर करीब 12 बजे डॉ. अग्रवाल
ड्यूटी से लौटे तो दरवाजे बंद मिले। अंदर रोने, चीखने और कुछ लोगों की आवाज
आ रही थी। इसी बीच तीन लोगों ने दरवाजा खोला और डॉ. अग्रवाल को भी दबोच कर
ड्राइंग रूम में घसीट ले गए। वहां उनकी पत्नी खून में लथपथ पड़ी थी।
नौकरानी
पार्वती घायलावस्था मेें सहमी खड़ी थी। दो वर्षीय पुत्र समीर रसोई के पास
रो रहा था। तीनों लुटेरों ने डॉ. अग्रवाल की घड़ी, जेब में पड़े 3,000
रुपये छीन लिए। इसी बीच पत्नी वंदना ने हिम्मत दिखाते हुए पहली मंजिल पर
स्थित मकान से नीचे छलांग लगा दी और सड़क से गुजर रही पुलिस जीप को जानकारी
दी।
पुलिस आई तो लुटेरे भाग निकले। लुटेरे 30,000 रुपये और
सोने-चांदी के जेवर लूट ले गए। घटना के विरोध में जिला अस्पताल में नौ
दिनोें तक हड़ताल रही।
काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने अलिहा (बांदा)
गांव के पास महिपत सिंह उर्फ बबलू और नायब सिंह उर्फ बबुआ को गिरफ्तार कर
लूटी गई घड़ी और तीन हजार रुपये बरामद किए। तफ्तीश में उजागर एक अन्य आरोपी
राजेश कुमार वाजपेयी (सैमरी) को भी अभियुक्त बनाया गया।
पुलिस ने विवेचना के बाद तीनों के विरुद्ध अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। शासकीय अधिवक्ता आशुतोष मिश्रा ने आठ गवाह पेश किए।
बृहस्पतिवार
को विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) बृजलाल चौरसिया ने अभियुक्त
महिपत सिंह उर्फ बबलू पुत्र मूलचंद्र निवासी ग्राम बड़ेहा, थाना देहात
कोतवाली (बांदा), नायब सिंह उर्फ बबुआ पुत्र रामसिंह और राजेश कुमार वाजपेई
पुत्र देवीप्रसाद (दोनों निवासी ग्राम सैमरी, थाना तिंदवारी) को धारा 394
आईपीसी में 10-10 वर्ष की कैद और 15-15 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।
इसके
अलावा महिपत सिंह व नायब सिंह को धारा 412 आईपीसी में 10-10 वर्ष की कैद
और 5-5 हजार रुपये की सजा दी। जुर्माना अदा न करने पर क्रमश: तीन माह और एक
माह की अतिरिक्त कैद और भुगतनी होगी। बरामद घड़ी और 3,000 रुपये पीड़ित
जीके अग्रवाल को वापस देने के आदेश अदालत ने दिए।