योगी सरकार के लघु और सीमांत किसानों के एक लाख रुपये तक के कर्ज माफ करने के फैसले से बांदा जिले के करीब 1.20 लाख किसानों को राहत मिलने के आसार हैं। दोनों श्रेणियों के किसानों पर 873 करोड़ रुपये का कर्ज है। जिले में लगभग डेढ़ लाख किसान बैंकों के कर्जदार हैं। इन पर 16 अरब 27 करोड़ 50 लाख रुपये का फसली ऋण बाकी है।
चुनाव पूर्व किए गए वादे के मुताबिक भाजपा सरकार ने मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की पहली ही बैठक में मंगलवार को एक लाख रुपये तक के लघु और सीमांत किसानों के फसली ऋण माफ करने का निर्णय लिया है। इसमें कहा गया है कि 31 मार्च 2016 तक लिए गए कर्ज में 31 मार्च 2017 तक चुकाई गई रकम को घटाकर अधिकतम एक लाख तक का कर्ज माफ किया जाएगा।
सरकार के इस फैसले से बांदा जिले के करीब 1,19,892 लघु और सीमांत किसान फायदा पा सकते हैं। जिले में कर्जदार किसानों की संख्या 1,49,334 है। इनमें 31,307 (21 फीसदी) लघु और 88,585 (51 फीसदी) सीमांत श्रेणी के किसान हैं।
जिले के कुल किसानों पर 16 अरब 27 करोड़ 50 लाख रुपये का फसली कर्ज बाकी है। इनमें लघु किसानों पर तीन अरब 41 करोड़ 80 लाख और सीमांत किसानों पर पांच अरब 31 करोड़ 50 लाख रुपये का कर्ज है। यानी दोनों श्रेणी के किसानों पर कुल आठ अरब 73 करोड़ 30 लाख रुपये के कर्ज का बोझ है।
29,442 किसान कर्जमाफी से बाहर
प्रदेश सरकार की कर्जमाफी दायरे से जिले के करीब साढ़े 29 हजार किसान बाहर हो गए हैं। आपसी बंटवारे के बाद भले ही इनकी खेती लघु और सीमांत किसानों के बराबर बची हो, लेकिन कागजों में रकबा एकमुश्त दर्ज होने से इन्हें कर्जमाफी का फायदा नहीं मिलेगा। बैंक आंकड़ों के मुताबिक जिले में कुल कर्जदार किसानों की संख्या 1,49,334 है। इसमें 88,585 सीमांत और 31,307 लघु (कुल 1,19,892) किसान हैं। यानी इन्हें छोड़कर जनपद में कर्जदार वृहद किसानों की तादाद 29,442 है। इन वृहद किसानों पर 7 अरब 54 करोड़ दो लाख रुपये का कर्ज है।
बैंकों को गाइड लाइन का इंतजार
बांदा। प्रदेश सरकार द्वारा कर्जमाफी का एलान कर दिए जाने के बाद फिलहाल बैंक शासनादेश/गाइड लाइन आने का इंतजार कर रहे हैं। बैंक अधिकारियों का कहना है कि इसके आने के बाद ही स्थिति साफ होगी कि दायरे में कौन किसान आएंगे और कौन बाहर होंगे? फिलहाल यह आंकड़े तैयार किए जा रहे हैं कि लघु और सीमांत श्रेणी के कितने किसान एक लाख तक या उससे अधिक के कर्जदार हैं।