गैसड़ी। पचपेड़वा क्षेत्र में बुधवार देर रात एनएच-730 पर शंकरपुर कला के पास दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने भिड़ंत में एक युवक की मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया। मृतक बृहस्पतिवार को मुंबई जाने की तैयारी में था।
जानकारी के अनुसार गंगाराम चौधरी (52) निवासी बिशुनपुर टनटनवा, जुम्मन यादव (28) निवासी बिशुनपुर टनटनवा थाना पचपेड़वा तथा बिंदेश्वरी (48) निवासी बगही सीर थाना गैसड़ी बाइक से बढ़नी से पचपेड़वा की ओर बाइक से आ रहे थे। दूसरी ओर राहुल यादव (26) निवासी बरगदवा सैफ पचपेड़वा बाइक से पचपेड़वा से बढ़नी की तरफ जा रहे थे। शंकरपुर कला के पास दोनों बाइकों में आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि चारों लोग सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पचपेड़वा पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने राहुल यादव को मृत घोषित कर दिया, जबकि अन्य घायलों की हालत गंभीर होने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। राहुल की मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। बताया जाता है कि राहुल के पिता का निधन करीब 25 वर्ष पहले हो चुका था। वह घर का इकलौता बेटा था। उसकी दो बहनों राधिका और सुशीला की शादी हो चुकी है। राहुल की शादी पांच वर्ष पूर्व हुई थी और उसकी एक छोटी बेटी है। मां दुलारी देवी, पत्नी नौमती और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक के चाचा रामगोपाल ने बताया कि राहुल अपने ससुराल त्रिलोकपुर जा रहा था। बृहस्पतिवार को उसे काम के सिलसिले में मुंबई रवाना होना था, लेकिन उससे पहले ही सड़क हादसे ने परिवार की खुशियां छीन लीं। प्रभारी निरीक्षक ओमप्रकाश चौहान ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
मां का इकलौता सहारा छीना, मासूम बेटी के सिर से उठा पिता का साया
मुंबई जाने की तैयारी कर रहे राहुल यादव शायद यह नहीं जानते थे कि बुधवार की रात उनकी जिंदगी की आखिरी रात साबित होगी। उनकी मौत से एक मां का इकलौता सहारा और मासूम बेटी के सिर से पिता का साया भी छीन लिया। पिता के जाने के बाद परिवार की जिम्मेदारी धीरे-धीरे राहुल के कंधों पर आ गई थी। परिवार की बेहतर जिंदगी के लिए वह अक्सर मुंबई जाकर काम करते थे। राहुल की मौत की खबर गांव पहुंचते ही मातम पसर गया। मां दुलारी देवी बार-बार बेटे का नाम लेकर बेहोश हो जा रही थीं। पत्नी नौमती की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मासूम बेटी अपने पिता को पुकारती रही, लेकिन उसे क्या पता कि अब उसके पिता कभी वापस नहीं आएंगे। गांव के लोगों का कहना है कि राहुल बेहद मिलनसार और मेहनती युवक था।