बलरामपुर। नेपाल में मतदान के मद्देनजर भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। मंगलवार को कोयलाबास सीमा पर जरवा में सघन जांच के दौरान दोहरी पहचान के साथ नेपाल में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे एक युवक को गिरफ्तार किया गया। मामला सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां इसे गंभीरता से लेते हुए व्यापक जांच में जुट गई हैं। वहीं बृहस्पतिवार को सुरक्षा और कड़ी रही।
एसएसबी की नौवीं वाहिनी की ओर से चलाए जा रहे विशेष जांच अभियान के दौरान जवानों ने संदिग्ध गतिविधि के आधार पर युवक को रोका। पूछताछ में उसने अपना नाम सुंदर केसी पुत्र प्रेम बहादुर निवासी अंगलुंग, थाना पुरुकोतदा, जिला गुलमी (नेपाल) बताया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वह तुलसीपुर क्षेत्र के पटियाला ग्रंट गांव में भी रह रहा था और लंबे समय से यहीं मजदूरी कर रहा था। नेपाल जाने के उद्देश्य के बारे में पूछने पर उसने मतदान करने की बात कही। प्रभारी निरीक्षक राकेश पाल ने बताया कि चुनाव को देखते हुए सतर्कता और बढ़ा दी गई है।
दो देशों के दस्तावेज मिलने से बढ़ी शंका
तलाशी में युवक ने पहले भारतीय आधार कार्ड प्रस्तुत किया, जिसमें उसका पता तुलसीपुर क्षेत्र के पटियाला ग्रंट गांव का दर्ज था। आगे पूछताछ में उसने नेपाल का नागरिकता प्रमाणपत्र भी दिखाया। एक ही व्यक्ति के पास दो देशों के वैध दस्तावेज मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। प्रारंभिक स्तर पर भारतीय आधार कार्ड के फर्जी होने की आशंका जताई गई है।
एफआईआर दर्ज, गहन छानबीन शुरू
एसएसबी ने युवक को कोतवाली जरवा पुलिस के सुपुर्द कर दिया। कोतवाली जरवा, जनपद बलरामपुर के प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार पाल ने बताया कि एसएसबी की तहरीर पर आरोपी के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। दस्तावेज की सत्यता की जांच कराई जा रही है और संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने बताया कि यदि आधार कार्ड फर्जी पाया जाता है या किसी संगठित गिरोह की भूमिका सामने आती है तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।
खुली सीमा और पहचान सत्यापन की चुनौती
भारत-नेपाल के बीच खुली सीमा व्यवस्था वर्षों से दोनों देशों के नागरिकों के आवागमन को सहज बनाती रही है। बड़ी संख्या में नेपाली नागरिक भारत में कामकाज करते हैं और भारतीय नागरिक भी नेपाल आते-जाते हैं। ऐसे में पहचान दस्तावेजों की सत्यता सुनिश्चित करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। नेपाल चुनाव जैसे संवेदनशील अवसर पर सीमा पर सख्ती बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि, फर्जी दस्तावेजों के उपयोग या चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की आशंका को समय रहते रोका जा सके।