बलरामपुर। शारदीय नवरात्र के चौथे दिन माता कूष्मांडा की पूजा के लिए देवी मंदिरों में श्रद्घालु उमड़ पड़े। भक्तों ने विधि विधान के साथ मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना की। भक्तों ने शाक-सब्जी एवं अन्न का दान कर माता कूष्मांडा से सुख-शांति एवं विश्व कल्याण की कामना की। शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में देवी दर्शन के लिए पूरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
मां भगवती की चौथी शक्ति को देवी कूष्मांडा के नाम से जाना जाता है और नवरात्र चतुर्थी के दिन देवी के इसी स्वरूप की पूजा का विधान है। धर्मग्रंथों के अनुसार देवी कूष्मांडा ने ही सृष्टि का विस्तार किया। अन्नपूर्णा स्वरूपा देवी ने लोगों को भूख-प्यास से व्याकुल देखकर शाकंभरी का रूप धरा और शाक-सब्जी व अन्न से पृथ्वी को परिपूर्ण कर दिया।
ऐसी मान्यता है कि प्रकृति और पर्यावरण की अधिष्ठात्री देवी कूष्मांडा की विधि पूर्वक पूजा करने से व्यक्ति के सभी रोग-शोक नष्ट हो जाते हैं। नवरात्र के चौथे दिन मंगलवार को शक्तिपीठ देवी पाटन मंदिर में भोर पहर से ही देवी के जयकारे से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो गया। श्रद्धालुओं ने सूर्यकुंड में स्नान करने के बाद कतारबद्ध होकर मां पाटेश्वरी का दर्शन किया। नारियल व चुनरी चढ़ाकर देवी से परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगा।
बलरामपुर-तुलसीपुर मार्ग पर स्थित बिजलीपुर मंदिर में भी देवी एवं श्रीयंत्र की पूजा के लिए पूरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इसके अतिरिक्त तुलसीपुर स्थित नई देवी मंदिर, सोहेलवा जंगल स्थित रहिया देवी मंदिर, नगर स्थित झारखण्डी मंदिर, सम्मय माता मंदिर, काली थान, बड़िकी बहिनी मंदिर, उतरौला स्थित ज्वाला महरानी मंदिर, पेहर बाजार स्थित दुर्गा मंदिर एवं महुआ इब्राहिम स्थित करिया दुर्गा मंदिर में भी माता रानी की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं ने मां की पूजा करने के साथ शाक-सब्जी व अन्न का दान करके विश्व शान्ति एवं मानव कल्याण की कामना की।