बलरामपुर। ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले की महिला स्वयं सहायता समूहों को स्वरोजगार के लिए ऋण देकर आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम तेज हो गई है। महिलाएं अब दोना-पत्तल निर्माण, चप्पल सिलाई, डेयरी संचालन, जैविक खाद उत्पादन तथा अचार-मुरब्बा बनाने जैसे छोटे उद्योगों से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति सशक्त बना रही हैं।
डीसी एनआरएलएम मंजू त्रिवेदी ने जानकारी दी कि समूहों की कैश क्रेडिट लिमिट निर्धारित कर उन्हें ऋण मुहैया कराया जा रहा है, जिससे वे कम पूंजी में अपना व्यवसाय शुरू कर सकें। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना के तहत भी चयनित महिलाओं को प्रशिक्षित कर स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। योजना के तहत वे महिलाएं आवेदन कर सकती हैं जिनकी उम्र 18 से 50 वर्ष के बीच है और जिनकी पारिवारिक वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम है। सरकार की इस पहल से गांव की महिलाओं को न सिर्फ रोजगार मिल रहा है, बल्कि वे अपने परिवार की आय में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।