महदेइया बाजार (बलरामपुर)। कभी बनारस, बलिया, दिल्ली और लखनऊ जैसे शहरों से आने वाली बिंदी और सौंदर्य प्रसाधन की सामग्री अब महदेइया सिरसिया गांव की महिलाओं द्वारा स्थानीय स्तर पर ही तैयार की जा रही है। इन महिलाओं ने न केवल आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है, बल्कि अपने प्रयासों से गांव की अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक बदलाव लाया है।
इस पहल की शुरुआत मन्ना देवी ने की। उन्होंने अन्य महिलाओं को प्रेरित कर ''शंकर स्वयं सहायता समूह'' का गठन किया। जिसमें 15 महिलाएं शामिल हुईं। समूह ने हर महीने 100 से 200 रुपये की बचत से कार्य की शुरुआत की और आज प्रत्येक महिला लगभग 4,000 रुपये प्रति माह तक की आमदनी कर रही है। मन्ना देवी बताती हैं कि त्योहारों और शादियों के मौसम में बिंदी की मांग काफी बढ़ जाती है, जिसके लिए अतिरिक्त काम करना पड़ता है।
महिलाओं की टीम तैयार कर सिखाया हुनर
मन्ना देवी के नेतृत्व में नंदनी, सोनू, लीलावती, निर्मला, प्रभा देवी, कोयला देवी, गेना, रीता देवी, संगीता, कुसुमावती, शोभावती जैसी महिलाओं की टीम तैयार की गई। सभी को बिंदी बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। बैंक से एक लाख रुपये का ऋण लेकर समूह ने अपने व्यवसाय को विस्तार दिया। आज ये महिलाएं महदेइया बाजार, सादुल्लाहनगर, पेहर बाजार, उतरौला, श्रीदत्तगंज और गैसड़ी जैसे बाजारों में बिंदी की आपूर्ति कर रही हैं। इनका मासिक कारोबार करीब एक लाख रुपये तक पहुंच चुका है।
विविध डिजाइन बना रहीं महिलाएं
समूह की महिलाएं अब बिंदी बनाने की विशेषज्ञ बन चुकी हैं। वे लंबी, गोल, चौड़ी, चंद्र और सूर्य आकार की आकर्षक बिंदियां तैयार कर रही हैं। साथ ही सभी रंगों की सजावटी बिंदियां भी बना रही हैं। मन्ना देवी बताती हैं कि हर धर्म और पसंद के अनुसार बिंदी के डिज़ाइन तैयार किए जाते हैं। कुछ ग्राहक विशेष ऑर्डर भी देते हैं। जिन्हें यह समूह अलग से तैयार करता है।
रोजगार को मिल रहा बढ़ावा
महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण और बैंकिंग सहयोग की व्यवस्था की जा रही है। बलिया की तर्ज पर बलरामपुर जिले में भी बिंदी उद्योग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
— मंजू त्रिवेदी, उपायुक्त, स्वयं रोजगार