फोटो-7-बलरामपुर के तुलसीपुर में सड़क चौड़ीकरण के लिए तोड़े गए मकान ।-संवाद
तुलसीपुर। नगर में फोरलेन, कॉरिडोर और ओवरब्रिज जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना पूरे होने पर संकट खड़ा हो गया है। हाईकोर्ट के आदेश पर फिर से मुआवजा का आकलन होगा। इसके बाद विकास कार्य हो सकेंगे। इन परियोजनाओं से लोग उत्साहित हैं, लेकिन प्रभावित परिवार अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनके जीवनभर की कमाई और आशियाने का उचित मूल्य मिलना चाहिए।
प्रभावित लोगों का आरोप है कि घनी आबादी वाले व्यावसायिक क्षेत्रों की जमीन का या तो सही मूल्यांकन नहीं किया गया या कई मामलों में उसका मुआवजा कृषि भूमि की दरों पर तय करने की कोशिश की गई। इसी को लेकर कई लोगों ने न्यायालय की शरण ली। हाईकोर्ट से आठ लोगों की रिट याचिका पर आए आदेश के बाद लोगों में न्याय मिलने की आस जगी है, जबकि छह अन्य याचिकाएं अभी विचाराधीन हैं। इससे पहले भी 12 लोग न्यायालय का दरवाजा खटखटा चुके हैं। प्रभावित नागरिक गुलाबचंद भारती, गणेश जायसवाल, गौरव, संजय, अशोक, सौरभ और अनिल कुमार का कहना है कि इस अधिग्रहण से करीब 360 लोग सीधे प्रभावित होंगे। सभी उचित व बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजे की मांग को लेकर एकजुट हैं।
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