बलरामपुर। राप्ती नदी की कटान रोकने को लेकर प्रशासन की हीलाहवाली से आक्रोशित ग्रामीणों ने मंगलवार को प्रदर्शन कर विरोध जताया।
उतरौला तहसील के टेढ़वा तप्पाबांक के मजरा गोनकोट निवासी कमरुद्दीन, अतीकुल्ला, जगदंबा, राजदेव मिश्र, जान मोहम्मद आदि ने मंगलवार को राप्ती नदी की कटान से गांव प्रभावित होने को लेकर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने कहा कि कई बार सूचना देने पर भी प्रशासन की तरफ से कोई मदद मुहैया नहीं कराई गई है।
राप्ती नदी से महज 15 मीटर की दूरी पर ही गांव बचा है। कई बार पत्र लिखने पर भी प्रशासन से मदद न मिलने पर क्षेत्रीय विधायक से शिकायत की गई। इस पर विधायक ने प्रशासन को फोन कर तत्काल कटान रोकने का प्रबंध करने का निर्देश दिया है। सदर तहसील के गोडवा गांव के मजरा सहिबानगर में भी कटान थमने का नाम नहीं ले रही है। राप्ती नदी ने अब तक आधे गांव को अपने आगोश में ले लिया है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से कटान रोकने के उपाय करने की मांग की है। तुलसीपुर विधायक कैलाशनाथ शुक्ल ने बीते दिन सहिबानगर का भ्रमण कर कटान पीड़ितों का हालचाल लेने के साथ ही प्रशासन को माकूल उपाय करने का निर्देश दिया था।
इसी तरह से सदर तहसील के लालपुर, फगुईया, गोसाईपुरवा, झौहन्ना व मोठहा में भी राप्ती नदी की कटान जारी है। इन सभी गांवों की सैकड़ों बीघे जमीन नदी ने निगल ली है। राप्ती की कटान में किसानों की फसलें भी धारा में बह गई हैं। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से कटान से होने वाली क्षति का आंकलन कराकर मदद कराने की गुहार लगाई है।
डीएम कृष्णा करुणेश ने बताया कि उतरौला के टेढ़वा तप्पाबांक के मजरा गोनकोट और सदर तहसील के गोड़वा गांव के मजरा सहिबानगर में कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड के अफसरों को निर्देश दिया गया है। कई अन्य गांवों में हो रही कटान का ब्योरा जुटाने के लिए संबंधित हल्का लेखपालों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।