बलरामपुर। राप्ती नदी के कटान का कहर लगातार जारी है। सदर व उतरौला तहसीलों के कई गांवों में राप्ती नदी कटान कर ग्रामीणों की बेशकीमती जमीनों को निगल रही है।
बाढ़ खंड की तरफ से कराए जा रहे कटान रोधी कार्य भी राप्ती नदी की विनाशलीला को नहीं रोक पा रहे हैं। कटान प्रभावित गांवों के लोगों ने डीएम से कटान रोधी कार्य तेजी से कराने की मांग की है जिससे उनकी बेशकीमती जमीनों को बचाया जा सके।
बलरामपुर-भड़रिया तटबंध राप्ती नदी के दाएं तट पर तेजी से कटान हो रही है। नदी के कटान को रोकने के लिए मौके पर बाढ़ खंड के अधिकारी जद्दोजहद कर रहे है। राप्ती नदी और तटबंध के बीच महज कुछ दूरी का ही फासला है।
इसी तरह से बाढ़ खंड के अधिकारी राप्ती नदी के दाएं तट पर स्थित ग्राम बौड़िहार में भी आबादी को बचाने के लिए कटान निरोधक कार्य करा रहे है। बौड़िहार गांव में राप्ती नदी से महज चंद मीटर की दूरी पर स्थित है।
सदर तहसील में ग्राम कल्यानपुर के दाएं तट पर राप्ती नदी तेजी से कटान कर रही है। गोसाईपुरवा व झौहना में भी राप्ती नदी के कटान का कहर जारी है। ढोढ़री गांव के पास भी राप्ती नदी तेजी से कटान कर रही है। करमहना भोजपुर तटबंध के पास भी राप्ती का कटान नहीं थम रहा है। उतरौला तहसील में परसौना गांव के पास भी राप्ती नदी के कटान का कहर जारी है।
सदर व उतरौला तहसील के 36 से अधिक स्थानों पर राप्ती नदी कटान कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि राप्ती नदी में कटान तेज हो गई है जिससे उनकी बेशकीमती जमीने राप्ती नदी में समाहित हो रही है। यदि प्रशासन की तरफ से कोई ठोस उपाय नहीं किए गए तो कई गांव के ग्रामीणों को अपना आशियाना भी उजाड़ना पड़ सकता है।
एडीएम वित्त एवं राजस्व अरुण कुमार शुक्ल ने बताया कि कटान वाले क्षेत्रों में बाढ़ खंड के अधिकारियों को कटानरोधी कार्य कराने का निर्देश दिया गया है। कटान क्षेत्रों में राजस्व निरीक्षकों व लेखपालों से निगरानी कराई जा रही है। तीनों तहसीलों के एसडीएम भी निरीक्षण कर कटान का जायजा ले रहे हैं।