गैड़ास बुजुर्ग। उतरौला तहसील के ग्राम इटईरामपुर में शुक्रवार शाम नहर में नहाने गईं दो सगी बहनों की डूबने से मौत हो गई। बालिकाओं की असमय मौत से घर में मातम पसर गया। परिजनों का भी रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
ग्राम इटईरामपुर के ग्राम प्रधान रमेश ने बताया कि गांव निवासी अकबर अली की पुत्री नसरीन (10) और महजबीन (7) शुक्रवार शाम करीब पांच बजे गांव के पास से गुजर रही सुबनजोत नहर में नहाने के लिए चली गई थीं। दोनों बच्चियां अक्सर गांव के अन्य बच्चों के साथ नहर किनारे खेलने जाया करती थीं। शुक्रवार को भी वे घर से निकलकर नहर पर पहुंच गईं और नहाने लगीं।
बताया जाता है कि नहाते समय अचानक दोनों का पैर फिसल गया और वे नहर के गहरे हिस्से में चली गईं। पानी का बहाव तेज होने और गहराई अधिक होने के कारण दोनों संभल नहीं सकीं और देखते ही देखते पानी में डूबने लगीं। वहां से गुजर रहे ग्रामीणों की नजर नहर में डूबती बच्चियों पर पड़ी तो उन्होंने शोर मचाया। शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने नहर में उतरकर बच्चियों की तलाश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद दोनों को नहर से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। घटना की सूचना मिलते ही परिजन और गांव के अन्य लोग भी मौके पर पहुंच गए। दोनों बच्चियों के शव देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
पांच बहनों और एक भाई में सबसे छोटी थीं दोनों, मुंबई में हैं पिता
बच्चियों के पिता अकबर अली मुंबई में एक टेंट की दुकान पर मजदूरी करते हैं। घटना की सूचना मिलते ही परिवार के लोगों ने उन्हें फोन पर जानकारी दी, जिसके बाद वह मुंबई से अपने गांव के लिए रवाना हो गए। पिता के आने का इंतजार पूरे परिवार को है। परिजनों के अनुसार परिवार में पांच बहनें और एक भाई था। इनमें नसरीन और महजबीन सबसे छोटी थीं। दोनों बच्चियों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
पहले भी हो चुके हैं हादसे, सुरक्षा बढ़ाने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के पास से गुजर रही नहर में अक्सर बच्चे नहाने के लिए चले जाते हैं। नहर की गहराई अधिक होने और किनारों पर सुरक्षा के इंतजाम न होने के कारण यहां हादसे का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी नहर में डूबने की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। ग्रामीण निसार, अकरम आदि ने प्रशासन से नहर किनारे चेतावनी बोर्ड लगाने, खतरनाक स्थानों पर बैरिकेडिंग कराने और बच्चों को नहर में जाने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
पोस्टमार्टम कराने के लिए तैयार नहीं हुआ परिवार
बालिकाओं का पोस्टमार्टम कराने के लिए परिवार तैयार नहीं हुआ। तहसीलदार वीरेंद्र प्रताप भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को समझाया, मुंबई में रह रहे पिता से भी बात की। गांव के लोगों ने भी समझाया लेकिन परिवार नहीं माना। जिला आपदा विशेषज्ञ अरुण सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम न होने से आर्थिक सहायता नहीं मिल सकेगी। परिवार को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था है।