बलरामपुर। एमबीबीएस डिग्री का फर्जी इस्तेमाल कर लखनऊ व बहराइच में तीन अस्पतालाें के संचालन का मामला सामने आया है। डॉ. जावेद खान की शिकायत पर सीएमओ ने जांच की तो पता चला कि आरोपियों ने उनके नाम व रजिस्ट्रेशन नंबर का गलत इस्तेमाल करते हुए तीन अस्पतालों का संचालन किया। साथ ही डॉक्टर के नाम से इलाज और फर्जी हस्ताक्षर भी किए।
पुलिस ने डॉ. जावेद की तहरीर पर मंगलवार को बहराइच के शैदा बभनी, रिसिया निवासी मो. रजा, डॉ. आवेश, डॉ. फरहीन के साथ ही जिले के महराजगंज तराई निवासी मो. शफीक, नई बाजार पचपेड़वा निवासी हस्मान व कारी कदीर के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, धमकी और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।
ग्राम बेतहनिया, थाना पचपेड़वा निवासी डॉ. मो. जावेद खान ने एमबीबीएस की डिग्री केजीएमयू लखनऊ से हासिल की है। उन्होंने बताया कि वह वर्तमान में नीट पीजी की तैयारी कर रहे हैं। कहा कि कुछ लोगों ने उनके फर्जी हस्ताक्षर व डिग्री की प्रतिलिपि का दुरुपयोग करते हुए तीन अस्पतालों का पंजीकरण उनके नाम पर करा लिया। इनमें सीतापुर जिले में लखनऊ सेवा अस्पताल रेउसा चौराहा, तंबौर रोड सीतापुर, लखनऊ सेवा अस्पताल राजी चौराहा, महसी थाना हरदी, बहराइच और एआर नर्सिंग होम जैतरापुर, बहराइच शामिल हैं।
इन अस्पतालों में आरोपियों ने न केवल डॉक्टर के नाम से अस्पताल पंजीकृत कराए, बल्कि बोर्ड, प्रिस्क्रिप्शन पैड और अस्पताल दस्तावेजों पर भी उनका नाम और मेडिकल रजिस्ट्रेशन नंबर छाप दिया। पुलिस ने अब मामले की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने भी प्रकरण में शामिल सभी संस्थानों की निगरानी बढ़ा दी है। प्रभारी निरीक्षक ओम प्रकाश चौहान ने बताया कि आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है और आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। पुलिस टीम ने दस्तावेजों की प्रति और अस्पतालों के रिकॉर्ड भी सीज कर लिए हैं। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक अमित चौरसिया को सौंपी है।
नवीनीकरण भी कराया, जानकारी के बाद किया गया निरस्त
आरोपियों ने रेउसा चौराहे पर स्थित लखनऊ सेवा अस्पताल का पंजीकरण समाप्त होने के बाद भी नवीनीकरण के लिए आवेदन कर दिया। इसके साथ ही बहराइच के सेवा अस्पताल राजी चौराहा, महसी का पंजीकरण पांच वर्ष के लिए पुनः नवीनीकृत भी करा लिया गया। डॉ. जावेद की शिकायत पर 20 जून 2025 को संबंधित जिलों के सीएमओ कार्यालयों में जांच कराई, जिसमें फर्जीवाड़ा प्रमाणित हुआ और संबंधित अस्पतालों के पंजीकरण निरस्त कर दिए गए। पंजीकरण निरस्त होने के बाद से ही डॉक्टर जावेद को धमकियां दी जाने लगीं। उनका कहना है कि 7 जुलाई 2025 की दोपहर 12 बजे, आरोपीगण में से कुछ लोग पचपेड़वा आकर उन्हें शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने लगे। गाली-गलौज करते हुए मेडिकल कॅरिअर बर्बाद करने और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद डॉ. जावेद ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई।