गैड़ास बुजुर्ग (बलरामपुर)। उतरौला तहसील क्षेत्र के डुडूहिया मस्जिदिया गांव पर राप्ती नदी की कटान का संकट लगातार गहराता जा रहा है। बरसात शुरू होने में जहां सिर्फ 65 दिन बचे हैं, वहीं गांव की सुरक्षा के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
गांव के लगभग 15 किसानों की करीब 97 बीघा उपजाऊ जमीन अब तक नदी में समा चुकी है, और 95 घरों पर विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों की चिंता इस बात को लेकर है कि यदि समय रहते कटानरोधी कार्य नहीं कराया गया, तो पूरा गांव राप्ती नदी की धारा में विलीन हो सकता है। राप्ती नदी की बाढ़ और कटान का प्रभाव बलरामपुर जनपद की तीनों तहसीलों के 350 से अधिक गांवों पर पड़ता है। इनमें सबसे अधिक नुकसान उतरौला क्षेत्र के गांवों को झेलना पड़ता है। डुडूहिया मस्जिदिया गांव नदी के बेहद नजदीक बसा हुआ है और हर साल जलप्रलय का सामना करता है। गांव निवासी सलमान ने बताया कि बरसात के दौरान पूरा गांव जलमग्न हो जाता है। खरीफ की फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाती है। हमारी आजीविका रबी की फसल पर ही निर्भर रह जाती है, उन्होंने कहा।
कटान से प्रभावित किसान
किसान का नाम
बर्बाद भूमि (बीघे में)
सलमान
10 बीघे
सनाउल्लाह
15 बीघे
सगीरुल हसन
5 बीघे
अनवारुल हसन
10 बीघे
मेराजुद्दीन
5 बीघे
सिराजुद्दीन
10 बीघे
सिर्फ आश्वासन, कोई कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से प्रशासन से कटानरोधी कार्य की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। गांव के चारों ओर नदी की कटान लगातार तेज हो रही है, जिससे स्थिति और भयावह होती जा रही है।
बजट मिलते ही होगा कार्य शुरू
डुडूहिया मस्जिदिया गांव के पास कटानरोधी कार्य के लिए बाढ़ खंड को प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दे दिया गया है। जैसे ही शासन से बजट स्वीकृत होगा, कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
राजेंद्र बहादुर, एसडीएम उतरौला