बलरामपुर। जिले में बर्फीली हवाएं सितम ढा रही हैं। मंगलवार को कुछ देर के लिए धूप खिली लेकिन वह राहत नहीं दे सकी। ठिठुरन बढ़ने से लोग अलाव के आसपास सिमटे नजर आ रहे थे। ठंड की वजह से अंगुलियां और हाथ-पैर भी सुन्न हो रहे हैं। दिन और रात के तापमान में अंतर ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है।
मंगलवार सुबह नौ बजे तक जिले में घना कोहरा छाया रहा और 11 बजे तक बदली छाई रही। कोहरा व सर्द हवाओं के कारण लोगों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ा। दोपहर करीब 12 बजे धूप निकली तो ठंड से कुछ राहत मिलने की उम्मीद जगी। धूप खिलने से बाजार चहल-पहल बढ़ी लेकिन हवा के थपेड़ों ने लोगों की कंपकंपी छुड़ा दी। शाम गहराते ही सर्द हवा ने लोगों को घरों में सिमटने पर मजबूर कर दिया। मौसम का यह उतार-चढ़ाव खासतौर पर कमजोर वर्ग और बुजुर्गों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। जिला आपदा विशेषज्ञ अरुण कुमार सिंह ने बताया कि जिले में अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान सात डिग्री सेल्सियस रिकाॅर्ड किया गया है।
फसल बर्बाद होने का सता रहा डर
बढ़ती ठंड से किसानों की चिंता गहराने लगी है। आलू, सरसों, मटर और सब्जी की फसलों पर पाले का खतरा बना हुआ है। सुबह-शाम खेतों में ठंड और नमी के कारण फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। किसान भानू त्रिपाठी, इरफान अली व शादाब आदि का कहना है कि तापमान में गिरावट से उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। कृषि वैज्ञानिक डाॅ. सियाराम कनौजिया ने बताया कि किसान पाले से बचाव के लिए हल्की सिंचाई, खेतों में धुआं करने और अन्य देसी उपाय करें। दोपहर की धूप से फसलों को कुछ राहत मिल रही है, लेकिन मौसम की अनिश्चितता से किसान परेशान हैं।
अस्पताल में बढ़ी मरीजों की संख्या
मौसम में बदलाव का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी साफ नजर आने लगा है। जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्दी, खांसी, बुखार, गले में संक्रमण और सांस से जुड़ी बीमारी वाले मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां 600 से 650 मरीज आते थे वहीं मंगलवार को 975 मरीज अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचे। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. ऋषि श्रीवास्तव का कहना है कि सुबह-शाम की ठंड, हवा और दोपहर की धूप के बीच शरीर के तापमान का संतुलन बिगड़ जाता है। इससे बच्चे और बुजुर्ग जल्द बीमार पड़ रहे हैं। लोगों को सर्दी से बचना चाहिए। उन्होंने गर्म कपड़े पहनने के साथ खानपान में सावधानी बरतने की सलाह दी है।
रैन बसेरों में बढ़ी जरूरत
ठंड बढ़ने से नगर के रोडवेज बस स्टेशन, आंबेडकर तिराहा व जिला महिला अस्पताल में बने रैन बसेरों में जरूरतमंदों की संख्या बढ़ी है। रात और सुबह के समय ठिठुरन से बचने के लिए गरीब, असहाय और बाहर से आए लोग रैन बसेरों का रुख कर रहे हैं। कई जगहों पर कंबल की मांग बढ़ी है।
रोडवेज व रेलवे स्टेशन पर यात्री परेशान
सुबह-शाम रोडवेज बस स्टेशन और रेलवे स्टेशन पर ठंड का असर सबसे अधिक दिख रहा है। यात्री अलाव के पास बैठकर समय गुजारते नजर आए। झारखंडी रेलवे स्टेशन पर लखनऊ जाने के लिए ट्रेन का इंतजार कर रहे घनश्याम, शिव कुमार, घिराऊ एवं इबरार आदि ने बताया कि प्लेटफार्म खुला होने के कारण सर्द हवा सीधे लगती है। गर्म कपड़े भी ठंड से मुकाबला नहीं कर पाते हैं। ऐसे में अलाव के पास मजबूरी में बैठना पड़ रहा है। जबकि ट्रेन के आने का समय हो जाएगा तो प्लेटफार्म पर पहुंच जाएंगे। रोडवेज पर बहराइच के लिए बस का इंतजार कर रहे नूर मोहम्मद व नूरजहां ने बताया कि इस ठंड में अलाव ही सहारा है।