बलरामपुर। जैन धर्म के पर्युषण महापर्व के अवसर पर आयोजित धर्मसभा में शांति, अहिंसा, सत्य, तप, त्याग, प्रेम और आत्मसंयम का संदेश दिया गया। सोमवार को हुए प्रवचन में श्रद्धालुओं से धर्म को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखकर उसे व्यवहार और जीवनशैली में उतारने का आह्वान किया गया। धर्मसभा में जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
प्रवाचक अशोक कुमार जैन ने कहा कि पर्युषण आत्मशुद्धि और आत्मजागरण का पर्व है। यह दूसरों को बदलने से पहले स्वयं में परिवर्तन लाने की प्रेरणा देता है। मन में शांति होने पर परिवार और समाज में भी सकारात्मक बदलाव आता है।
प्रवाचक नरेश चंद्र ने कहा कि भगवान महावीर का अहिंसा और करुणा का संदेश पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक है। अहिंसा केवल किसी जीव को कष्ट न देने तक सीमित नहीं, बल्कि विचार और वाणी से किसी के हृदय को ठेस न पहुंचाना भी इसका हिस्सा है। उन्होंने प्रेम, करुणा और सद्भाव अपनाने की अपील की।
प्रवाचक आर्ची जैन ने कहा कि मधुर वाणी, मुस्कान और उदार हृदय रिश्तों को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने युवाओं को संयम, संस्कार, चरित्र और अनुशासन का महत्व समझाया।