-बलरामपुर के ललिया क्षेत्र में फसल की सिंचाई करता किसान।-संवाद
बलरामपुर। जलवायु परिवर्तन का असर मौसम पर देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान में तापमान विगत वर्ष की अपेक्षा सामान्य तापमान से 3-4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। पूर्वानुमान है कि इस वर्ष पिछले साल की अपेक्षा अधिक गर्मी पड़ेगी। इसका असर फसलों पर भी पड़ रहा है। गेहूं व सरसों की फसलें इससे प्रभावित हो रही हैं।
तापमान में हो रही बढ़ोत्तरी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। पहली मार्च को जिले का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस रहा। दो मार्च को अधिकतम 33 व न्यूनतम 17, तीन को अधिकतम 34 व न्यूनतम 17 रिकार्ड किया गया है। चार मार्च को अधिकतम 33 व न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस का अनुमान है।
जिला आपदा विशेषज्ञ अरुण सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर जिलाधिकारी के निर्देशन में हीट वेब (लूू) प्रबंधन के लिए राजस्व, स्वास्थ्य विभाग, पंचायतीराज, आपूर्ति विभाग, नगर निकायों, पशुपालन व पुलिस कृषि सहित अन्य विभागों के माध्यम से कार्ययोजना तैयार की जा रही है। गांव-गांव लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न माध्यमों का सहारा लिया जा रहा है।
मौसम का असर सेहत पर भी पड़ रहा है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इसमें वायरल के सबसे अधिक मरीज हैं। शुक्रवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में बुखार के 35 से 40 मरीज पहुंचे।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. जयप्रकाश ने कहा कि तापमान में हो रही बढ़ोत्तरी को देखते हुए किसान गेहूं की सिंचाई कर सकते हैं। वर्तमान में गेहूं में दाने का विकास हो रहा है। ऐसे में नमी न मिलने से वह सूख जाएंगे। इसलिए सिंचाई आवश्यक है। सरसों सहित अन्य फसलों पर भी मौसम का असर पड़ना तय माना जा रहा है।