बलरामपुर। राज्य सरकार निपुण भारत मिशन के तहत परिषदीय विद्यालयों में बुनियादी शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए लगातार अभियान चला रही है। जनपद में भी निपुण दिवस पर विविध कार्यक्रम हो रहे हैं, लेकिन इस मिशन को मजबूत आधार देने वाला संस्थान डायट पिछले 20 वर्षों से बिना मान्यता के ही संचालित हो रहा है। यह स्थिति न केवल निपुण आकलन में बाधा बन रही है, बल्कि जिले की रैंकिंग को भी प्रभावित कर रही है।
डायट बलरामपुर की इमारत वर्ष 2005 में ही बनकर तैयार हो गई थी। प्राचार्य और प्रवक्ता की तैनाती भी हो चुकी है, लेकिन मान्यता न होने से अब तक किसी भी बैच का प्रशिक्षण शुरू नहीं हो सका है। नतीजतन, निपुण आकलन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए प्रशिक्षु उपलब्ध नहीं हो पाते। बीते शैक्षिक सत्र में यही समस्या सामने आई थी। जिसे पयागपुर (बहराइच) के डायट से प्रशिक्षु मंगाकर किसी तरह पूरा किया गया।
डायट की मान्यता न होने से जिले के डीएलएड अभ्यर्थियों को गोंडा स्थित दर्जीकुंआ डायट में प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है। आज भी बलरामपुर जिले के 100 सीटों का कोटा गोंडा डायट से जुड़ा हुआ है। वहां दाखिला लेने वाले प्रशिक्षुओं को रोज़ाना 60 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। डायट प्राचार्य मृदुला आनंद ने बताया कि मान्यता प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। संबंधित निदेशालय को प्रस्ताव भेजा गया है। लेकिन अब तक कोई सकारात्मक निर्णय नहीं आया है।