बलरामपुर। एक आपत्तिजनक पोस्ट पर हुई एफआईआर में आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस की मनमानी पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। उतरौला के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) जेएम योगेश कुमार चौधरी ने पुलिस की गिरफ्तारी के साथ ही अपनाए गए तरीके पर सवाल उठाया है। उन्होंने पुलिस से पूछा कि जब घटना के दिन ही आरोपी मिल गए तो उन्हें गिरफ्तार क्यों किया। उन्होंने दोनों आरोपियों के विरुद्ध पुलिस की ओर से मांगी गई रिमांड खारिज कर दी। साथ ही पूरे मामले की रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक को कार्रवाई के लिए भेजा है। वहीं पुलिस पर अवमानना की कार्रवाई के लिए उच्च न्यायालय को पत्र भेजा है।
थाने में भीम आर्मी भारत एकता मिशन के जिलाध्यक्ष राकेश कुमार भारतीय ने 22 मई रिपोर्ट दर्ज कराई कि थाराभाई मोहित नाम के सोशल मीडिया फेसबुक आईडी से अपलोड की गई एक वीडियो से बाबा साहब भीमराव आंबेडकर का अपमान किया गया है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। थाने के उपनिरीक्षक सुनील कुमार यादव ने मामले में दूसरे दिन दारी चौरा निवासी मोहित कुमार त्रिगुनायत व शिव त्रिगुनायत को गिरफ्तारी न्यायालय मुंसिफ मजिस्ट्रेट उतरौला के यहां पेश कर रिमांड मांगी।
मुंसिफ मजिस्ट्रेट योगेश कुमार चौधरी ने केस डायरी में पाया कि दरोगा ने धारा 41ए सीआरपीसी का नियमत पालन नहीं किया है और आरोपियों की गिरफ्तारी अवैध है। मुंसिफ मजिस्ट्रेट उतरौला ने दरोगा के खिलाफ न्यायालय की अवमानना के लिए उच्च न्यायालय को रिपोर्ट संदर्भित करने का आदेश दिया है। न्यायालय की इस कार्रवाई से थाना श्रीदत्तगंज पुलिस में हड़कंप मच गया है। फिलहाल एसपी केशव कुमार का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। आदेश का परीक्षण कर उचित कार्रवाई की जा रही है।