देवीपाटन धाम से लेकर नेपालगंज स्थित बाघेश्वरी देवी मंदिर और प्रभूनाथ धाम तक आस्था की यह अनोखी शृंखला दोनों देशों के श्रद्धालुओं को जोड़ती है। इस संबंध को और सशक्त करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है, जिससे सीमा पर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
नेपाल के चौखड़ा धाम स्थित मां पाटेश्वरी के अनन्य भक्त बाबा रतननाथ का प्रभुनाथ मंदिर आस्था का केंद्र है। हर वर्ष पंचमी से दशमी तक यहां से लगभग 500 श्रद्धालु देवीपाटन मंदिर तक की पैदल यात्रा करते हैं। यह यात्रा केवल भक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत-नेपाल के आध्यात्मिक संबंधों की जीवंत मिसाल है। देवीपाटन पीठाधीश्वर मिथिलेश नाथ योगी कहते हैं कि नेपाल के अनेक मंदिरों में मां पाटेश्वरी की अखंड ज्योति से ही दीप प्रज्जवलित किए जाते हैं। यह दोनों देशों की आस्था और आत्मीयता का अद्भुत संगम है।
नेपालगंज के बाघेश्वरी मंदिर प्रबंधक शंकर दयाल खनान बताते हैं कि देवीपाटन से बाघेश्वरी तक की धार्मिक कड़ी वर्षों पुरानी है। अब सीमा पर हो रहे विकास कार्यों और नवनिर्मित मार्गों से श्रद्धालुओं का आवागमन सहज होगा। इससे सीमांत व्यापार, परिवहन और पर्यटन सेवाओं को फिर से गति मिलेगी।
बदलेगी सीमांत की सूरत, खुलेगा रोजगार का मार्ग
देवीपाटन मंदिर के साथ ही सीमांत क्षेत्र में कई ऐसे प्राचीन मंदिर और स्थल हैं, जिनका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व नेपाल में भी गहराई से जुड़ा है। बालापुर स्थित बालेश्वरी देवी मंदिर, जनकपुर का मुक्तेश्वरनाथ मंदिर और सोहेलवा जंगल के बीच अवस्थित रोहिया माता मंदिर इस सांस्कृतिक विरासत की पहचान है। कोयलाबास के निवासी रामजी कहते हैं कि सीमा पर हो रहे बदलाव से अब विकास की उम्मीद बढ़ी है। यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ेगी, तो बाजारों में रौनक लौटेगी। होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की मांग भी बढ़ेगी। पर्यटन विभाग के अनुसार सीमा से सटे धार्मिक स्थलों को आपस में जोड़ने वाले मार्गों का विकास किया जाएगा। इन स्थलों को धार्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि श्रद्धालु एक ही यात्रा में भारत और नेपाल के प्रमुख मंदिरों के दर्शन कर सकें।
आस्था की रोशनी से जगमगाएगा सीमांत
स्थानीय साधु-संतों का कहना है कि देवीपाटन धाम की आध्यात्मिक शक्ति पूरे तराई क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत है। यहां की अखंड ज्योति नेपाल के अनेक मंदिरों में प्रज्ज्वलित होती है, जो दोनों देशों के धार्मिक एकत्व का प्रतीक है। रोहिया माता मंदिर के पुजारी सुखदेव प्रसाद कहते हैं कि सीमा पर बन रहे मैत्री द्वार, चौकी और व्यापारिक ढांचे इस पवित्र धारा को और सशक्त करेंगे।