नेपाल से सटे संवेदनशील जिले में पकड़े गए अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह के तार दुबई, बांग्लादेश और अफ्रीकी देशों से भी जुड़ने के संकेत मिल रहे हैं। मामला टेरर फंडिंग का होने के कारण सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के कुछ हैंडलर इन देशों में सक्रिय हैं। संदेह है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल भारत विरोधी तत्वों तक धन पहुंचाने के लिए किया जा रहा था।
टेरर फंडिंग गिरोह के सरगना सस्पियर ने 350 से अधिक बैंक खाते खुलवाए, जिनमें रोजाना लाखों रुपये का ट्रांजेक्शन होता था। इन रुपयों को विदेशी खातों में भेजा जाता था। पुलिस को आशंका है कि भारत से पाकिस्तान भेजे गए 8.15 करोड़ रुपये का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के वित्त पोषण (टेरर फंडिंग) में किया गया है। पुलिस ने इस गंभीर कड़ी को सामने लाते हुए ईडी, आईबी और एनआईए को सूचना दी है।
अब तक की जांच में स्पष्ट हो चुका है कि गिरोह भारत के अलग-अलग राज्यों में सक्रिय था। फर्जी निवेश, नौकरी और लॉटरी के नाम पर लाखों रुपये ऐंठकर उन्हें बैंक खातों के जरिए पाकिस्तान तक पहुंचाते थे। इस पूरी प्रक्रिया में क्रिप्टो और हवाला चैनलों का उपयोग किया गया। गिरोह के पास से बरामद मोबाइल, लैपटॉप और सिम कार्ड में पैसों के ट्रांसफर, विदेशी खातों और वॉलेट से जुड़े तमाम सबूत मिले हैं। इन सभी साक्ष्यों के आधार पर लेनदेन ऐसे खातों में हुआ है, जो पहले भी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल रहे हैं।
कोड को डिकोड करने में जूझ रही जांच टीम
टेरर फंडिंग से जोड़कर हो रही जांच में गिरोह के कोड वर्ड को डिकोड करने में पुलिस टीम जुटी है। पुलिस ने बताया कि आरोपी लेनदेन के लिए ब्लैकबीट, पैकेट, बर्ड जैसे कोडवर्ड का इस्तेमाल करते थे। इन कोड वर्ड में कई अहम राज छुपे हैं। एसपी विकास ने बताया कि तकनीकी स्तर पर जांच हो रही है। बड़े स्तर पर भी छानबीन हो रही है।