देवीपाटन मंदिर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंत महेंद्र नाथ योगी की 25वीं पुण्यतिथि पर सोमवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। शाम करीब 5.44 बजे पहुंचे मुख्यमंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म का अर्थ केवल पूजा, उपासना या अनुष्ठान नहीं है, बल्कि समाज को नई दिशा देना और लोककल्याण का मार्ग भी दिखाना है। देवीपाटन धाम इस सत्य का सशक्त उदाहरण है, जिसने धार्मिक आस्था को समाजसेवा से जोड़कर यह दिखाया है कि जहां भक्ति है, वहीं सेवा है। असल में मंदिर सिर्फ आराधना का केंद्र नहीं बल्कि सेवा, शिक्षा और संस्कार के भी माध्यम हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से तीन-चार दशक पहले देवीपाटन केवल एक मंदिर परिसर था, लेकिन अब यह धार्मिक आस्था और जनसेवा का केंद्र बन चुका है। यहां धर्मशालाओं के साथ अस्पताल, विद्यालय, छात्रावास और समाज के वंचित वर्गों के लिए शिक्षा-स्वास्थ्य की समग्र व्यवस्था है।
वर्ष 1994 में देवीपाटन मंदिर परिसर में स्थापित छात्रावास उस समय की सामाजिक क्रांति थी। सीमांत गांवों में बसे थारू समुदाय के बच्चे तब शिक्षा से कोसों दूर थे। देवीपाटन मंदिर ने उन्हें शिक्षित करने का अवसर दिया। समाज में आगे बढ़ने का मार्ग भी खोला। आज यह देखकर गर्व होता है कि देवीपाटन छात्रावास से पढ़े अनेक बच्चे समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं। यही सच्ची सेवा है। सीएम ने कहा कि अब मंदिर परिसर में सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध आधुनिक स्कूल भी संचालित है, जहां आसपास के गांवों के बच्चे आधुनिक शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यह धर्म और शिक्षा के संगम का जीवंत प्रतीक है।
धर्म का उद्देश्य समाज को नई दिशा देना है
योगी ने कहा कि धर्म केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि कर्तव्य का बोध कराने वाली शक्ति है। हर व्यक्ति जब अपने कर्तव्यों का पालन करता है, तब देश मजबूत बनता है। उन्होंने कहा कि जो व्यापारी ईमानदारी से कर देता है, जो शिक्षक निष्ठा से बच्चों को पढ़ाता है, जो पुलिसकर्मी समर्पण से ड्यूटी निभाता है, वह भी भारत माता की सेवा कर रहा होता है। देवीपाटन धाम का यह रूप उस भारतीय परंपरा का प्रतीक है, जिसमें मंदिर केवल पूजा का केंद्र नहीं, बल्कि सेवा, शिक्षा और संस्कार का भी माध्यम होता है।
यह वर्ष संविधान, सरदार पटेल, बिरसा मुंडा और वंदे मातरम का अमृत संगम
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वर्ष भारत के इतिहास में अनेक महान अवसरों का संगम लेकर आया है। लौहपुरुष सरदार पटेल की 150वीं जयंती, वंदे मातरम के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी की 149वीं पुण्यतिथि, भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, संविधान निर्माण के 75 वर्ष का अमृत महोत्सव और इसी वर्ष महाकुंभ 2025 का आयोजन हुआ। ये सभी अवसर हमें हमारी जड़ों से जोड़ते हैं और बताते हैं कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति, उसकी विविधता और उसकी एकता में बसती है।
जागरूक युवा ही राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल ने कहा था कि स्वतंत्रता केवल आजादी नहीं, बल्कि उसकी रक्षा की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे राष्ट्र चेतना से ओतप्रोत होकर आगे बढ़ें। देश का युवा जब जागृत रहेगा, तब कोई शक्ति भारत को झुका नहीं सकती।
संविधान ने दिया जनता को सरकार चुनने का अधिकार
भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा और सर्वश्रेष्ठ संविधान है, जिसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि देश की सरकार चुनने का अधिकार किसी बाहरी शक्ति को नहीं, बल्कि भारत की आम जनता को प्राप्त है। सीएम ने कहा कि यह शक्ति बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की देन है, जिन्होंने समाज के हर वर्ग को समान अवसर और अधिकार देने का काम किया।
एक भारत श्रेष्ठ भारत का संकल्प साकार हो रहा
योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज हर क्षेत्र में शीर्ष पर पहुंच रहा है। चाहे वह तकनीक हो, शिक्षा, कृषि या सुरक्षा। राज्य सरकार भी उसी भावना से कार्य कर रही है कि हर नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहे और भारत को विश्वगुरु बनाने में योगदान दे। जब समाज में धर्म का अर्थ सेवा से जुड़ जाता है, तब वही राष्ट्र सशक्त और आत्मनिर्भर बनता है।
मंदिर परिसर में रात्रि विश्राम, सुबह मंदिर में पूजन व गोसेवा करेंगे
मुख्यमंत्री मंदिर परिसर में ही रात्रि विश्राम करेंगे। मंगलवार सुबह मां पाटेश्वरी की पूजन-अर्चन करने के बाद गो-सेवा करेंगे। मंदिर परिसर में लोगों से भेंट भी करेंगे। इसके बाद लखनऊ रवाना हो जाएंगे। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ने देर शाम अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस दौरान कथा में उपस्थित महंत अशोक नाथ, अयोध्या धाम महंत मूरत नाथ, हनुमानगढ़ी अयोध्या धाम महंत रामलखन दास, महंत बलराम दास, दशरथ गद्दी के महंत बृजमोहन दास, महंत धर्मदास, महंत कौशल किशोर, मानधार महंत, अवधेश कुमार दास, महंत तुलसीदास, परसपुर करौंदा के महंत शिवेंद्र नाथ योगी, राजघाट के महंत ज्ञानी नाथ योगी, रसड़ा के महंत कौशलेंद्र गिरी भी मौजूद रहे।