बलरामपुर। मुश्किल हालात इंसान की असली ताकत को सामने लाते हैं। कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया है बलरामपुर डिपो की वरिष्ठ केंद्र प्रभारी तरन्नुम ने। पति की मृत्यु के बाद टूटने के बजाय परिवार व समाज के खिलाफ जाकर मृतक आश्रित नौकरी करने की ठानी। अपने अधिकार पाने के लिए खुद भागदौड़ कर रोडवेज में बुकिंग क्लर्क पद पर नौकरी पाई। मेहनत व ईमानदारी से नौकरी करने के कारण वर्ष 2015 में प्रोन्नति पाकर वह बलरामपुर डिपो के इंचार्ज की कुर्सी तक पहुंच कर मिसाल पेश की।
वर्ष 2000 हजार में पति मोहम्मद सलार की मौत के बाद तरन्नुम के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पति की मृत्यु के समय तीन छोटे-छोटे बच्चे थे। तरन्नुम उस समय हार मानने के बजाय अपने बच्चों की परवरिश और परिवार की जिम्मेदारी को संभालने का निर्णय लिया। पति की जगह मृतक आश्रित में नौकरी पाने के लिए भागदौड़ शुरू की। कड़ी मशक्कत करने के बाद उनको बलरामपुर डिपो में बुकिंग क्लर्क के पद पर नियुक्ति मिल सकी। तरन्नुम बताती हैं कि पति की मृत्यु के समय बच्चे बहुत छोटे थे। समझ नहीं आ रहा था कि वह बच्चों को लालन-पालन व भरण-पोषण कैसे कर पाएगी। घर-परिवार की तरफ से भी उस समय महिलाओं को बाहर नौकरी करने की इजाजत नहीं थी। बच्चों के भविष्य के लिए समाज से लड़कर नौकरी करने का निर्णय लिया था। तरन्नुम ने नौकरी के साथ एक बेटी सबीना नाज व दो बेटे मो. इमरान व सलमान की परवरिश व पढ़ा-लिखाकर खुद के पैरों पर खड़ा कर दिया है। बेटी की तो शादी कर दी। वहीं एक बेटा मो. इमरान परिवहन निगम में ही परिचालक के पद पर कार्यरत हैं, वहीं दूसरा बेटा मो. सलमान नागपुर में एक निजी कंपनी में काम कर रहा है। तरन्नुम वर्तमान में बलरामपुर डिपो इंचार्ज के पद पर कार्यरत हैं। तरन्नुम ने विपरीत परिस्थितियों में जिस साहस और धैर्य के साथ उन्होंने अपने परिवार को संभाला, वह दूसरों के लिए प्रेरणा है।